ऋषि प्रसाद

सांसारिक, आध्यात्मिक उन्नति, उत्तम स्वास्थ्य, साँस्कृतिक शिक्षा, मोक्ष के सोपान – ऋषि प्रसाद। हरि ओम्।

यह कर लो तो सारी परेशानियाँ भाग जायेंगी ! – पूज्य बापू जी


एक होती है सत्-वस्तु, दूसरी होती है मिथ्या वस्तु । मन की जो कल्पनाएँ, जो फुरने हैं यह है मिथ्या वस्तु । ‘यह करूँगा तो सुखी होऊँगा’, ‘यह पाऊँगा तो सुखी होऊँगा’ ‘यहाँ जाऊँगा तो सुखी होऊँगा’…. इन वस्तुओं में उलझ-उलझकर ही आपने अपने जीवन को टुकड़े-टुकड़े कर डाला है । सत्-वस्तु से तात्पर्य है  …

Read More ..

…..तो 33 करोड़ देवता भी उसके आगे हो जायें नतमस्तक – पूज्य बापू जी


मैंने एक पौराणिक कथा सुनी है । एक बार देवर्षि नारद जी ने किसी बूढ़े को कहाः “काका ! इतने बीमार हो । संसार तो संसार है, चलो मैं तुम्हें स्वर्ग ले चलता हूँ ।” बूढ़े ने कहाः “नारदजी ! मैं स्वर्ग दो जरूर आऊँ लेकिन मेरी एक इच्चा पूरी हो जाय बस ! मेरे …

Read More ..

धर्म के लिए कितना समय देना चाहिए ?


पूज्य बापू जी के साथ प्रश्नोत्तरी प्रश्नः महाराज श्री ! जीवन में धर्म के लिए कितना समय देना चाहिए ? पूज्य बापू जीः धर्म क्या है ? जो सारे ब्रह्माण्डों को धारण कर रहा है और जो तुम्हारे शरीर को धारण कर रहा है । उसके लिए कितना समय देना चाहिए ? अरे ! मनुष्य …

Read More ..