Yearly Archives: 2010

हिन्दू समाज को कलंकित करने का अंतर्राष्ट्रीय षडयंत्र


सुश्री उमा भारती, पूर्व केन्द्रीय मंत्री एवं पूर्व मुख्यमंत्री, मध्य प्रदेश

5-6 साल से भारत के मान्यवर साधु-संतों को बदनाम करने की शुरूआत हुई। उसमें पहला नम्बर आया कांची पीठ के शंकराचार्य जयेन्द्र सरस्वती जी का। इन महापुरुष को बलात्कार और हत्या का आरोपी बना दिया गया व बाद में साजिश की पोल खुलने पर दोनों मामलों से वे बरी भी हो गये, लेकिन इन पाँच सालों में उन पर व उनके अनुयायियों पर क्या गुजरी होगी ! हिन्दू समाज की प्रतिष्ठा को कितना नुकसान हुआ ! अब दूसरा टारगेट आसारामजी बापू हैं। बापू तो निकलेंगे निर्दोष होकर लेकिन तब तक प्रतिष्ठा का जो नुक्सान होगा उसकी भरपाई कर पायेगा कोई ? भगवान के घर से भरपाई होती है तो अपने तरीके से होती है। शंकराचार्य के संदर्भ में भगवान के घर से हुई भरपाई ! गुमराह होकर ऐसे पापकर्म करने वाली जयललिता ने ऐसी मुँह की खायी कि अब वह कभी उठकर खड़ी नहीं हो सकती भारत की राजनीति में।

मैं मीडिया के सभी बन्धुओं को कहूँगी कि आपको अपनी जिम्मेदारी इतनी तो समझनी पड़ेगी कि इन संस्थाओं के साथ लाखों करोड़ों लोग जुड़े होते हैं। उन लोगों ने इन संस्थाओं से जुड़कर शराब छोड़ी, दुराचरण छोड़े और उनकी जिंदगी बदल गयी। वे बापू के साथ जुड़ गये तो मानवता की सेवा में लग गये, अच्छे कामों में लग गये, उन्होंने बीड़ी सिगरेट तक छोड़ दिया। जब इन लोगों की श्रद्धा पर आप कुप्रचार द्वारा प्रहार करेंगे तो वे फिर से बुराई के रास्ते पर जायेंगे।

मुझे बहुत दुःख हुआ कि बापू के बारे में ऐसी बातें हुईं। वे भी वहाँ से उदभूत हुई जहाँ पर हमारी विचारधारा वाली सरकार हो। जिनका काम है कि वे साधु-संतों की रक्षा करें, अगर वे ही साधु-संतों पर कुठाराघात करेंगे तो फिर तो अधर्म और पाप का इतना बोलबाला होगा कि फिर वह रोके नहीं रुकेगा। साधक महिलाओं, बालकों, बुजुर्गों के सात कितनी मारपीट हुई है ! यह ठीक नहीं है। साधु-संत ही हैं जो अच्छाई को फूँक-फूँककर सुलगाये हुए हैं, जिन्दा रखे रहे हैं और हम इन्हीं की साँस बंद करने का प्रयास करें तो इससे बड़ा पाप हमारे लिये और क्या हो सकता है ! हम हिन्दू हितों की रक्षा की बात करते हैं और अगर हिन्दू हितों की रक्षा करने वाली पार्टी के ऊपर ये आरोप लग जायें तो फिर हिन्दू समाज किसके दरवाजे पर जायेगा ? मैं आडवाणी जी को मिली थी और वे स्वयं गाँधीनगर से साँसद भी हैं। मैंने उनको कहा था कि कुछ तथ्यों पर आप गौर करिये। बिना इन पर गौर किये हम एक हवा में बह जायें और जो अंतर्राष्ट्रीय षडयंत्र चल रहा है हिन्दू समाज को पथभ्रष्ट कर देने का, हम ही गलती से उस षडयंत्र में भागीदार हो जायें, यह अच्छा नहीं है। इन तथ्यों पर नरेन्द्र मोदी भी गौर करें और बी.जे.पी. के नेता भी –

पहला- अगर बापू के आश्रम में से किसी ने गुरुकुल के बच्चों की हत्या होती तो क्या उनके शव आश्रम के पीछे फेंक देते ?

दूसरा- राजू जिसने स्वयं अपने गुनाह कबूल कर लिये हैं, उनका जीना तो सच को अदालत में साबित करने के लिए जरूरी है तो उसे मरवाने की कोशिश आश्रम क्यों करेगा ?

तीसरा- जमीनों की जहाँ तक बात है, ये जमीनें संस्था को या तो भेंट में प्राप्त हुई हैं अथवा तो खरीदी हुई हैं, जिनके खरीदी के दस्तावेज मौजूद हैं। वे तो आप देखिये !

चौथा- क्या बापू ने यह कहा है कि “मैं नरेन्द्र मोदी की सत्ता मिटा दूँगा।” बापू ने ऐसा कभी नहीं कहा बल्कि चैनलवाले ही बापू के सिर्फ चित्र दिखाकर साथ-साथ खुद बढ़ा-चढ़ाकर शब्द डाल रहे हैं। एंकर और रिपोर्टर जो बोल रहा है उसका कोई मतलब नहीं होता है। मैं मध्य प्रदेश की मुख्यमंत्री थी तब बापू के आश्रम में रुकी हूँ और मेरे पूरे कार्यकाल में कभी प्रशासन या सी.आई.डी. द्वारा आश्रम के संदर्भ में किसी गैरकानूनी कार्य की शिकायत सामने नहीं आयी। बापू को मैं अपना पिता मानती हूँ। बापू पर आरोप बिल्कुल निराधार हैं और इसकी गारंटी मैं लेती हूँ। बापू की संस्था में कोई रहस्यमय गतिविधि नहीं है। जो है सब खुला है। भजन, कीर्तन, सत्संग होता है, साधना होती है। इनकी स्पष्ट गतिविधियाँ हैं कि वे लोगों की बुराइयाँ छुड़ा रहे हैं, गौ सेवा आदि में लगे हैं। तो आसारामजी बापू जैसे संत जो इस प्रकार से समाज-हित के कार्यों में लगे हैं, हमें तो इनके सहयोगी बनना चाहिए।

स्रोतः ऋषि प्रसाद, जनवरी 2010, पृष्ठ संख्या 8, 25

ॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐ

भ्रांति में न आना, निष्ठा निभाना


महामंडलेश्वर आचार्य 1008 स्वामी श्री परमात्मानंदजी महाराज, वृन्दावन

महान संत आसाराम बापू जी को हम सच्चा कुंदन समझते हैं, उनको सच्चा पारसमणि समझते हैं। हमने उनको नजदीक से देखा है, कम से कम 50 साल से देखते आ रहे हैं। ऐसा संत इस विश्व में न भूतो न भविष्यति। उन पर ये चाण्डाल-चाण्डाल लोग जो दोषारोपण कर रहे हैं वह सम्पूर्णतया मिथ्या है। थोड़े दिन के अंदर दूध का दूध पानी का पानी हो जायेगा। हमारे आसारामजी बापू महाराज निर्दोष थे, निर्दोष हैं और निर्दोष ही रहेंगे। आप किसी भ्रांति में नहीं आना, किसी अज्ञानता में न आना, किसी के षडयंत्र में नहीं आना बल्कि अपनी श्रद्धा, अपना विश्वास, अपनी आस्था, अपनी निष्ठा प्राणपण से निभाना।

देखिये, जो सत्य होता है उसके लिए कोई क्रियाएँ नहीं करनी पड़तीं लेकिन जो झूठ होता है उसके लिए सौ-सौ षडयंत्र करने पड़ते हैं। दो और दो चार, यह सत्य है लेकिन दो और दो चार को पाँच बनाने के लिए चेष्टा करनी पड़ेगी, षडयंत्र करना पड़ेगा और फिर भी कभी-न-कभी पोल खुल ही जायेगी।

जो समाज के शरीर को कष्ट देना चाहता है वह शासक नहीं होता, शासक वह होता है जो समाज के हृदय में बैठ जाय। राष्ट्र के सही नियामक, सही प्रशासक तो बापू आसारामजी जैसे संत हैं, जो समाज को शांति दे रहे हैं। सच्चा शासन तो संत करते हैं।

शासन करने में रावण भी बड़ा प्रभावशाली था, राम भी बड़े प्रभावशाली थे लेकिन याद रखना, रावण में एक चीज़ थी और राम में दूसरी चीज़ थी जो हमारे संतों में है। रावण में प्रभाव था लेकिन ‘स्व’ भाव नहीं था और राम में प्रभाव भी था और ‘स्व’ भाव भी था इसलिए सारे राष्ट्र में राम जी के प्रति पूज्यभाव है।

हमारे आसारामजी बापू में प्रभाव भी है, सारा विश्व जानता है और ‘स्व’ भाव भी है, आत्मीय भाव भी है, नहीं तो उनके लिए यहाँ बैठते इतने संत-महापुरूष, भक्त ! भाव से आये हैं। जैसा भाव तुम्हारे हृदय में होगा वैसा ही तुम्हारा संसार बनेगा। यह भाव तन में आ जाय तो दान बन जाता है, पाँव में आ जाये तो नृत्य बन जाता है, वाणी में आ जाय तो प्रेमाश्रु बन जाता है, होठों में आ जाय तो मुस्कराहट बन जाता है। यही भाव हृदय में आ जाय तो प्रेम बन जाता है और आसारामजी जैसे साधु-संतों और गुरुओं के प्रति हो जाय तो श्रद्धा बन जाता है और वहाँ दृढ़ हो जाये तो भगवान से एकाकार करने वाली परम आनंददायिनी भक्ति बन जाता है।

कुछ विषधर साँपों ने समाज की संस्कृति को हड़पने का षडयंत्र किया है, सँभल जाना। ये संत समाज की शांति है, समाज का विश्वास है, राष्ट्र की अमानत है, राष्ट्र के मनीषी हैं, राष्ट्र का धर्म हैं, राष्ट्र के भगवान हैं और इनकी रक्षा करना हमारा धर्म है। धर्मो रक्षति रक्षितः। तुम धर्म की रक्षा करो, धर्म तुम्हारी रक्षा करेगा।

स्रोतः ऋषि प्रसाद, जनवरी 2010, पृष्ठ संख्या 7

ॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐ

बापू जैसे सूफी संत अल्लाह के नूर हैं


मोहम्मद इरफान सलमानी, सदस्य राष्ट्रीय मुस्लिम मंच

सूफी संत, महात्मा जो हैं सारे हमारे बुजुर्ग हैं। इनसे हमें सीखने को मिलता है, ये हमारे मार्गदर्शक है। अगर इनके बारे में कोई अखबार हलकी धारणाएँ रखता है, कोई कुछ लिख देता है या कोई छाप देता है तो यह गलत बात है ही। जैसे हमारे पिता हैं, हम अपने पिता के बारे में घिसा-पिटा नहीं सुन सकते हैं तो गुरु तो हमारे पिता के भी पिता होते हैं।

सूफी संत अल्लाह का नूर हैं, बापू ऐसे ही सूफी हैं। ऐसे सूफी के बारे में कोई खराब बोलता है तो हमें तकलीफ होती है।

बापू जी के बारे में तो शायद बच्चा-बच्चा जानता है। बापू जी के आश्रम में लोगों की आँखें खुलती हैं। जहाँ तक मैं अपने समाज के बारे में जानता हूँ, मेरे से ज्यादा बापू जी मेरे समाज के बारे में जानते हैं। मैं उनको चैनल पर देखता हूँ और कई प्रोग्राम उनके अटेंड भी करे हैं मैंने। तो उनके सत्संग में आने के बाद दिल के अंदर एक नयी-सी खुशी जागती है। बापू जी ने कभी किसी का बुरा तो करा नहीं है सिवाय अच्छा के। वे यही चाहते हैं कि हर परिवार सुखी रहे, परिवार में शांति रहे और वे यही रास्ता दिखाते हैं। तो यही इन कुछ लोगों को पसंद नहीं है।

बापू जी के बारे में ये जो अपशब्द कहे जा रहे हैं, ये जो विकल्प दिये जा रहे हैं ये सब झूठ हैं। मैंने कई परिवार देखे हैं जो बापू जी के प्रवचनों से सुख शांति का जीवन व्यतीत कर रहे हैं – उनकी सिर्फ एक वाणी से। वे एक बार जो बात बोल देते हैं उसे पूरा परिवार एक्सेप्ट (स्वीकार) कर लेता है और सही रास्ते पर चलने लगता है। यह इन लोगों (कुप्रचारकों) को पसंद नहीं। बापू कहते हैं नशा मत करो। नशा बेचने वालों को बुरा लगेगा। बापू कहते हैं बुरी आदतें छोड़ दो। बुरी आदतें सिखाने वालों को बुरा लगेगा। तो बापू सिर्फ सीधा रास्ता दिखाते हैं, अक्सर लोग मिलते हैं टेढ़े रास्ते दिखाने वाले। ऐसे लोग ही बापू का कुप्रचार कर रहे हैं।

मौलवी हातीफ कासिम, रोहिणी-दिल्ली मस्जिद के इमामः सूफी संत का काम है सिर्फ सच्चाई दिखाना, अच्छा रास्ता बताना। इसलिए हमारे सूफी बापू आसारामजी भी हैं। उनको कोई समझने वाला चाहिए। उनके अंदर की भावना जो नहीं समझेगा वह उनको क्या समझेगा ! अरे, वह तो बहुत बदनसीब है इन्सान, जिसने बापू के लिए अनर्गल छापा है। अगर सच्चाई पता चलती तो कदमों पर गिर जाता वह ! उसकी किस्मत में ही नहीं है उनके कदमों पर गिरना, पहुँच क्या जायेगा ! उसने जो भी किया है बहुत ही बुरा किया है। ‘संदेश’ अखबार को बंद कर दिया जाय, बरखास्त कर दिया जाय।

बापू पर इल्जाम सभी सूफी फकीरों की तौहीन है और यह इल्जाम नाजायज है।

स्रोतः ऋषि प्रसाद, जनवरी 2010, पृष्ठ संख्या 11

ॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐ