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तौबा-तौबा ! कैसी दुःखदायी है ममता ! – पूज्य बापू जी


तुलसी ममता राम सौं, समता सब संसार।

ममता अगर करनी है तो अंतर्यामी प्रभु से करो। ʹबेटे का क्या होगा, बेटी का क्या होगा, दुकान का क्या होगा, फलाने का क्या होगा, फलानी का क्या होगा ?ʹ

ऐसा सोचते रहने वाले दुःखी होकर मर जाते हैं। फिर कहाँ जायेंगे, कौन सी योनि में भटकेंगे कोई पता नहीं। कोई भी बुद्धिमान व्यक्ति ऐसी लाचारी की स्थिति नहीं चाहता है। जैसे घर से निकलने से पहले ही बुद्धिमान व्यक्ति यह सोच लेता है कि कहाँ जायेंगे, क्या खायेंगे, कहां रहेंगे आदि। ऐसे ही जीवन की शाम होने से पहले वह सोच लेता है कि ʹमर जायेंगे तो हमारा क्या होगा ?ʹ

एक दादा-दादी थे। उनकी बहू के दो बच्चे थे – एक बेटा, एक बेटी। दादा-दादी को अपने पोते-पोती से बहुत प्रेम था। मरने के बाद वे कुत्ता कुत्ती बन गये और जब पोता-पोती बाहर शौच करने को बैठते तो दोनों रखवाली करते। कोई यात्री आये या कोई दूसरा कुत्ता वहाँ से पसार हो तो कुतिया खूब भौंकती थी। एक दिन बहू को गुस्सा आया कि कुतिया रोज शोर मचाती है। उसने उठाकर डंडा दे मारा तो कुतिया की कमर टूट गयी। दोनों पैरों को घसीटते-घसीटते लँगड़ाकर चलती। अब उसका भौंकना कम हो गया।

दैवयोग कहो, सर्वसमर्थ ईश्वर की लीला कहो उस कुत्ते और कुत्ती को पूर्वजन्म की स्मृति आ गयी। कुत्ते ने कहाः “राँड ! इन बेटों, पोतों की ममता ने तो कुत्ता और कुत्ती बनाया। तू भौंकती थी और मुझे भी भौंकने को मजबूर करती थी। तेरे भौंकने का फल देख ले। कौन तेरा है ? जिस बहू को ʹलाडी-लाडीʹ करके लाड़ करती थी और बच्चों को दूध पिलाती थी, उसी ने उन बच्चों के कारण तेरी कमर तोड़ दी। अगर यही ममता भगवान से की होती तो तेरी मेरी दुर्गति नहीं होती। अभी चुपचाप बैठ।”

बाद में बहू और बेटे को किन्हीं संत से पता चला कि ʹयही हमारे माता-पिता थे ! अब कुत्ता कुत्ती होकर आये हैं। बच्चे शौच करते हैं तो वहाँ चौकी करते हैं।ʹ

हे भगवान ! तौबा-तौबा ! कैसी दुःखदायी है ममता ! भगवान से ममता नहीं करोगे तो पुत्र-पौत्र, मकान आदि जहाँ भी ममता होगी वहाँ आना पड़ेगा। भगवान करें कि भगवान ही आपको प्यारे लगें, भगवान ही आपको अपने लगें, भगवान करें कि भगवान में ही मन लग जाये। भगवान के नाते तत्परता से काम करो। जैसे पत्नी पति के नाते सासु की, ससुर की, जेठ की, ननद की, मेहमानों की सेवा कर लेती है ऐसे भगवान के नाते सभी से व्यवहार करो, ममता के नाते नहीं। ʹभविष्य में यह काम आयेगा, मेरा यह भला कर देगा, यह दे देगा….।ʹ नहीं, ईश्वर के नाते कर्म करो।

नर-नारियों के रूप में, पक्षियों के रूप में,  पशुओं के रूप में सब जगह चेतना उस परमेश्वर की है। हे हरि ! हे नारायण ! हे प्रभु ! बस भगवान का ज्ञान, भगवान का सुमिरन और भगवान की प्रीति। यदि प्रेम करना हो तो उसी से करो, प्रार्थना करनी हो तो उसी से करो, ममता करनी हो तो उसी से करो। यदि झगड़ा करना हो तो भी उसी से करो क्योंकि उसके जैसा सच्चा मित्र और सम्बंधी दूसरा कोई नहीं है।

स्रोतः ऋषि प्रसाद, सितम्बर 2013, अंक 249

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पूज्य बापू जी को बदनाम करने का सुनियोजित षड्यन्त्र


पिछले 50 वर्षों से ʹसंयम-साधना व सत्संगʹ की महिमा को जन जन तक पहुँचाने वाले एवं पिछले 8 वर्षों से विश्वभर के युवानों को ओज-तेज का नाश करने वाले ʹवेलेन्टाइन डेʹ की जगह 14 फरवरी को ʹमातृ-पितृ पूजन दिवसʹ मनाने की सुन्दर प्रेरणा देने वाले पूज्य संत श्री आसाराम जी बापू संयम, स्नेह, ब्रह्मचर्य, ब्रह्मनिष्ठा व लोक कल्याण के मूर्तिमंत स्वरूप हैं। परन्तु भारतीय संस्कृति के खिलाफ कार्य करने वाली विधर्मी ताकतें तथा जिन्हें भारतवासियों की नैतिक एवं सांस्कृतिक उन्नति से भारी नुक्सान होता है वे मीडिया के माध्यम से करोड़ों रूपये खर्च करके भी समय-समय पर संत श्री के खिलाफ बड़े-बड़े षड्यन्त्र करते आये हैं। ऐसे ही एक सोचे समझे षड्यन्त्र के तहत 20 अगस्त को उत्तर प्रदेश की एक लड़की को मोहरा बनाकर उसके द्वारा छेड़खानी करने का झूठा आरोप लगवाया गया और फैलाया गया कि बलात्कार का आरोप लगाया गया है। अधिकांश मीडिया द्वारा झूठी, निराधार व बापू जी की छवि खराब करने वाली खबरें फैलाकर करोड़ों देशवासियों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचायी गयी।

कैसे शुरु हुआ घिनौना षड्यन्त्र

उत्तर प्रदेश की लड़की, जो मध्य प्रदेश में पढ़ रही थी, जोधपुर (राजस्थान) में उसके साथ छेड़खानी हुई ऐसी एफ आई आर दर्ज करवाती है, कहाँ जाकर ? दिल्ली के भीतर कमला मार्केट थाने में पहुँचकर ! वह भी पाँच दिन बाद रात 2-45 बजे !

लड़की की एफ आई आर में स्पष्ट या अस्पष्ट रूप से कहीं भी किसी भी तरह से दुष्कर्म (रेप) का उल्लेख नहीं है। लेकिन प्रसार माध्यमों का सहारा लेकर ʹरेप हुआ हैʹ व ʹमेडिकल टेस्ट में रेप की पुष्टि हुई हैʹ ऐसी झूठी खबरें फैलायी गयीं।

लड़की की मेडिकल जाँच रिपोर्ट में रेप की बात को पूरी तरह खारिज कर दिया गया है एवं इसके बावजूद रेप की गैर जमानती धारा 376 लगायी गयी, जो पूज्य बापू जी को बदनाम करने की सोची समझी साजिश है। इस बात के लिए राजस्थान पुलिस ने दिल्ली पुलिस को फटकार लगायी तथा जोधपुर पुलिस डीसीपी अजय पाल लाम्बा ने स्पष्ट रूप से स्वीकार भी किया कि दिल्ली पुलिस ने केस गलत तरीके से दर्ज किया है।

दिनांक 27 अगस्त को पूज्य श्री इंदौर आश्रम में थे। वहाँ ʹसमन्सʹ थमाया गया कि 30 तारीख तक जोधपुर आना है। उसी समय बापू जी ने कई महत्त्वपूर्ण कारण दर्शाते हुए कुछ मोहलत माँगी थी और ʹसमन्सʹ थमाने वाले ने उस अर्जी पर अपने हस्ताक्षर भी कर दिये थे कि ʹहम अर्जी को आगे तक पहुँचायेंगे।ʹ बापू जी पूर्वनिर्धारित जन्माष्टमी कार्यक्रम के निमित्त 28 अगस्त को सूरत आश्रम में थे।

अपने कर्मयोगी शिष्य का अंतिम संस्कार करने हेतु भोपाल पहुँचे

मध्य प्रदेश के कई आश्रमों के सेवा-प्रभारी, सेवानिष्ठ साधक, भोपाल आश्रम के वरिष्ठ पदाधिकारी व नारायण साँई के ससुर श्री देव कृष्णानी जी इस षड्यन्त्र को सहन नहीं कर पाये। राजस्थान पुलिस का छिंदवाड़ा गुरुकुल की बच्चियों पर मानसिक दबाव, धाक-धमकी द्वारा जबरदस्ती मनचाहे बयान लेने जैसी हरकतों से तथा पूज्य बापू जी की गिरफ्तारी के लिए षड्यन्त्रकारियों द्वारा रची गयी गहरी साजिश से उन्हें बहुत बड़ा सदमा लगा। उनकी धार्मिक भावनाएँ आहत होने से उन्होंने अन्न जल का त्याग कर दिया था। अपने दिल की पीड़ा भोपाल कलेक्टर को ज्ञापन के रूप में दी व जब पीड़ा का कुछ निराकरण न दिखाई दिया तो हार्ट अटैस से अपनी जान दे डाली। झूठी कल्पित कहानियाँ बनाने वालों ने दो दिन से अन्न जल त्यागकर बैठे हुए इन सेवायोगी साधक के प्राण ले लिए। 29 अगस्त को प्रातः 3-20 बजे उन्होंने शरीर छोड़ दिया। कुप्रचार के पूर्व वे पूरी तरह स्वस्थ थे। देशभर के साधकों ने इसका शोक जताया है। उन्होंने गुहार लगायी है कि बिना तथ्यों की झूठी खबरें न फैलायी जायें ताकि हमें हमारे महत्त्वपूर्ण, राष्ट्रसेवी साधकों को इस प्रकार खोना न पड़े।

पूज्य बापू जी देव कृष्णानी के हादसे को सुनकर उनके अंतिम संस्कार के लिए बीच जन्माष्टमी कार्यक्रम में ही सूरत से भोपाल पहुँचे। उनको बेटियाँ ही थीं, अतः बापू जी, अन्य रिश्तेदारों व साधकों ने कंधा दिया।

पूज्य बापू जी को गिरफ्तार करने की घिनौनी साजिश

राजस्थान पुलिस को मोहलत बढ़ाने के लिए खबर की गयी थी। कोई उत्तर न मिलने पर 30 तारीख को जेट एयरवेज की टिकट बापू जी ने करा ली थी। परंतु ट्राइजेमिनल न्यराल्जिया (आयुर्वेद के अनुसार अनंत वात) की भयंकर पीड़ा के कारण टिकट कैंसल करानी पड़ी। यह पीड़ा प्रसूति व हार्ट अटैक की पीड़ा से भी अधिक भयंकर होती है। इसमें थोड़ी सी असावधानी से शरीर का अंत हो सकता है, व्यक्ति की मौत हो सकती है। इंटरनैट पर सबसे पीड़ा दायक रोग के रूप में इसका वर्णन आता है। फिर शाम को भोपाल से वाया दिल्ली जोधपुर जाने हेतु भोपाल एयरपोर्ट पहुँचे परंतु मीडिया व लोगों की भीड़ के कारण बोर्डिंग काउंटर बन्द हो गया। टिकटों के प्रूफ भी हमारे पास हैं।

परिश्रम, जागरण, तनाव होने पर भी बापू जी बाई रोड इंदौर के अपने आश्रम पहुँचे। किसी अनजान स्थान पर नहीं गये। इसके विपरीत कुछ-का-कुछ उछाला गया कि भाग गये आदि। मध्य प्रदेश की पुलिस 31 तारीख को सुबह लगभग 6 बजे आश्रम पहुँच चुकी थी और पूरी कुटिया को सैंकड़ों पुलिसवालों ने घेर लिया था। दोपहर तक भक्त भारी सँख्या में इकट्ठे हो गये थे। 31 तारीख रात को इंदौर आश्रम के व्यासपीठ से जाहिर सत्संग में बापू जी ने 167 देशों को इंटरनेट लाइव संदेश देते हुए खुलेआम कहाः “हम जोधपुर पुलिस का इंतजार कर रहे हैं व स्वागत करते हैं। किसी कारण से शरीर की अचानक पीड़ा से नहीं जा पाये। वह पीड़ा अभी तक यथावत बनी हुई है।”

पूज्य श्री का रक्तचाप 160-120 था। हृदय में भारीपन व छाती में दर्द भी था। वैद्यों ने पुलिस से निवेदन किया कि हम डॉक्टर को बुलाना चाहते हैं। डॉक्टर आये। जोधपुर की पुलिस आश्रम में पहुँच गयी। बापू जी ने उनसे कहाः “आप निश्चिंत रहना। हम भाग नहीं जायेंगे, हम भगेड़ू नहीं हैं। हम वचन देते हैं कि आपको पूरा सहयोग करेंगे।”

पुलिस ने कहाः “कल सुबह 7.50 की फ्लाईट से हम आपको दिल्ली ल जायेंगे। आगे कनेक्टिंग फ्लाईट से जोधपुर।” बापू जी ने सहमति दी।

कलबल-छल से की गिरफ्तारी

रात्रि 10-30 बजे बापू जी अपने कमरे में विश्राम के लिए चले गये। 11 बजे के आसपास पुलिस ने आश्रम में सर्वत्र शांति से बैठकर जप-पाठ करने वाले भक्तों को उठाना चालू किया। बड़ी बेरहमी से अपमानजनक वचन सुनाकर अपने डंडों से पीटते हुए पुलिस ने भक्तों को उठाकर आश्रम की सड़कें खाली कर दीं। भक्तों को एक जगह बैठाकर चारों तरफ से बैरियर लगाये गये। उस समय इंदौर आश्रम में 800 से भी अधिक संख्या में पुलिस थी। रात के 12 बजे तक बहुत बड़ा कोलाहल मच गया था। 12 बजे पुलिस की गाड़ी कुटिया में आ गयी। पुलिस ने सेवकों से कहाः “हम 10-15 मिनट बापू जी से सवाल करना चाहते हैं। आप बाहर बुलायइये।”

सेवकों ने हाथ जोड़कर प्रार्थना कीः “बहुत थके हुए हैं, विश्राम में हैं। आपको जो कुछ भी पूछना है, सुबह पूछ लीजिये।”

पुलिस का दबाव बढ़ता गया। जब ऊँची आवाज में चिल्लाने लगे तब गुरुदेव अपने कमरे से बाहर आ गये। पुलिस ने कहाः “रात के 12 बज चुके हैं। 4 दिन के ʹसमन्सʹ का समय पूरा हो चुका है, हम आपको यहाँ से ले जायेंगे।”

सेवकों ने कहाः “आपने ही कहा था कि सुबह की फ्लाइट से ले जायेंगे, रात को यहीं विश्राम कर लें। तो आप आधी रात को क्यों जबरदस्ती कर रहे हो ?”

पुलिस चिल्लाने लगीः “हम क्या तुम्हारी बात मानने आये हैं ? समय पूरा हो चुका है, हम लेकर जायेंगे।”

गुरुदेव उठकर पुलिस की गाड़ी में बैठने लगे। सेवक से अपना आसन माँगा। पुलिस ने बदतमीजी से कहाः “कोई आवश्यकता नहीं आसन-वासन की, बैठ जाओ।”

अंगद सेवक भागकर पानी की बोतल व बैग लेकर आया। पुलिस ने गाड़ी में नहीं रखने दिया। गुरुदेव के दोनों तरफ, आगे व पीछे पुलिस बैठ गयी। पुलिस की गाड़ी कुटिया के द्वार से बाहर निकल गयी। बाकी की पुलिस ने कुटिया के अंदर सेवकों पर लाठीचार्ज चालू कर दिया। भक्त गुरुदेव की गाड़ी की ओर दौड़ पड़े। लाठीचार्ज जारी रहा। गाड़ी आश्रम के प्रवेशद्वार से बाहर निकल गयी। पुलिस ने कहा था कि ʹसुबह ले जायेंगेʹ पर रात को 12-20 बजे ʹमार्शल-लॉʹ की रीति से एयरपोर्ट पर ले गये। रात को 1 बजे से सुबह तक बापू जी को एयरपोर्ट पर बिठाकर  रखा गया। सुबह जैसे ही फ्लाइट में चढ़े, मीडिया ने अंदर भी सताना चालू रखा।

दिल्ली से जोधपुर की फ्लाइट पकड़कर जोधपुर पहुँचे। उतरते ही कानूनी जाँच चालू हुई। इतना उन्हें कम लगा तो रात 12-30 तक जाँच जारी रखी। यह लगातार दूसरी रात थी कि बापू जी थोड़ी देर भी सो नहीं पाये। पूछताछ के दौरान बापू जी ने यौन-शौषण के बारे में कहाः “हम ऐसा काम कर ही नहीं सकते।”

पूज्य बापू जी पुलिस की नजरकैद में थे। कैमरे लगे हुए थे। एक सेवक साथ में था। सेवक ने देखा कि सिर की दाहिनी तरफ काफी सूजन है। पूछने पर पता चला कि तीव्र दर्द भी है। रात भर के जागरण से ʹट्राइजेमिनल न्यूराल्जियाʹ की पीड़ा भयंकर रूप लेने लगी। जोथपुर की पुलिस कस्टडी में शिरोधारा का उपचार एकमात्र उपाय था। भयंकर हालत देखकर पुलिस को अपना मानसिक दबाव रोकना पड़ा और उन्होंने उपचार कराने की अनुमति दी। एम आर आई स्कैन में इस रोग के सभी कारणों को जाना नहीं जाता। वेबसाइट पर इसकी भयंकरता का वर्णन मिलता है। पिछले 13 वर्षों से बापू जी इस भयंकर पीड़ा से ग्रस्त हैं। इतने वर्षों में हुए रोगोपचार की 100 से भी अधिक रिपोर्टें नीता वैद्य के पास हैं। कहाँ गयी मानवता ? जैसा व्यवहार बापू जी के साथ हुआ, ऐसा किसी के साथ न करें।

अभी भी आपने मुझे कहाँ पकड़ा है ?”

सेवक ने देखा की संत श्री उसी छोटे से कमरे में अपनी लाल टोपी व धोती पहनकर टहल रहे थे और गा रहे थेः मम दिल मस्त सदा तुम रहना… आन पड़े सो सहना। मम दिल…. पुलिस को सत्संग के वचन सुना रहे थे, उनका नियम जो है प्रतिदिन सत्संग करने का !

पुलिस पूछताछ के दरम्यान भी वे पुलिस को बीच-बीच में ज्ञान की बात सुनाते थे। एक पुलिस ने उनसे पूछाः “बापू ! आप तो कहते थे कि पुलिस मुझे पकड़ नहीं सकती।”

बापू जी ने कहाः “वह तो है ही, अभी भी आपने मुझे कहाँ पकड़ा है ?”

हिन्दू धर्म को कोई भी कदापि नहीं मिटा सकता।

सेवक ने पूज्य श्री से कहाः “गुरुदेव ! हमारा जो विश्वास है कि सत्य की जीत होती है, उसे टूटने नहीं देना।”

बापू जीः “वह तो है ही। इतिहास साक्षी है।”

सेवकः “गुरुदेव ! हमसे यह सब सहन नहीं होता। भक्त अत्यंत व्यथित हैं, सड़क पर उतर आये हैं।”

पूज्य श्रीः “भगवन्नाम का जप करें।”

सेवकः “गुरुदेव ! अगर कूटनीति ऐसे ही चलती रहेगी और संतशिरोमणी को ही जेल में डाला जायेगा तो सारा संत-समाज ही धीरे-धीरे नेस्तनाबूद किया जायेगा। हिन्दू धर्म की जड़ें उखाड़ दी जायेंगी।”

पूज्य श्री (आँखें बन्द, चेहरा शांत)- “हिन्दू धर्म को कोई भी कदापि नहीं मिटा सकता।”

पुलिस ने सेवकों को कमरे से बाहर निकाल दिया। गुरुदेव के श्रीचरणों में प्रणाम करके वे निकल गये।

रिमांड होम में सेवक देख रहे थे कि जो भी पुलिसवाला आता पूज्य श्री उससे उसके स्वास्थ्य के बारे में उपाय बताते थे। उनके सहज विनोदी स्वभाव के अनुसार वे चुटकियाँ भी लेते थे। सुबह-शाम खुली हवा में घूमने का नियम है, वह कमरे ही घूमकर पूरा करते थे।

उसके बाद शाम 4-4.30 बजे न्यायालय में ले जाया गया। 5 ही मिनट मे सुनवाई हुई – ʹजेलʹ। पूज्य श्री को जोधपुर के केन्द्रीय कारागृह में ले जाया गया।

मच्छरों का बाहुल्य व रोग के उपचार के अभाव में इन संत ने कितने कष्ट सहे यह भगवान जानते हैं और वे ही जानते हैं। मीडिया द्वारा फैलाया गया कि बापू जी को जेल में कूलर, पलंग आदि सुविधाएँ दी जा रही हैं। जबकि ऐसा कुछ नहीं है। न कूलर, न तखत, न कोई सुविधा ! स्वयं जेल अधीक्षक द्वारा इसकी पुष्टि हो चुकी है।

सनसनी फैलाने वाली खबरों ने ʹपीड़िता-पीड़िताʹ कहकर महिलाओं को पीड़ित करने का काम किया है। साजिश के तहत बापू जी की गिरफ्तारी से व्यथित लाखों-लाखों माँ-बहनें व महिलाएँ उपवास रख रही हैं।

दहेज व रेप आदि के झूठे केसों की बहुतायत से असंख्य नर-नारियाँ, कई बेगुनाह परिवार, निर्दोष आत्माएँ साजिशकर्ताओं के शिकार होकर कारावास में पीड़ाएँ सह रही हैं। ऐसे झूठे मुकद्दमे देश व मानवता का गला नहीं घोंटते क्या ?

एक अधिकारी ने बताया कि “95 प्रतिशत रेप के केस झूठे साबित हुए हैं। मेरे 12 साल के कार्यकाल में मात्र 3 केस ही सच साबित हुए हैं।”

मैं इस गुरुकुल को बदनाम करके बंद करवाऊँगी

कुछ दिनों पहले लड़की अस्वस्थ थी। उसका इलाज भी हुआ। इसके सबूत भी हैं। फिर उसने मानसिक अस्वस्थता दिखायी। सहेलियों से मिली जानकारी के अनुसार वह बाथरूम बंद करके तथा देर रात को छत पर टहलते हुए घंटों फोन पर बात करती रहती थी।

आरोप लगाने वाली लड़की के बारे में छिंदवाड़ा गुरुकुल की एक छात्रा ने कहाः वह गुरुकुल में रहना ही नहीं चाहती थी। उसे फिल्में देखना, लड़कों के बारे में चर्चा करना, फास्टफूड – इनमें अधिक रूचि थी। इन कारणों से लड़की बिगड़ न जाये इस हेतु पिता ने जबरदस्ती उसे गुरुकुल में रखा था।

गुरुकुल का सात्त्विक भोजन व नियम-जप आदि करके वहाँ के संय वातावरण में रहना उसके लिए कठिन था। वह छुप-छुप के फिल्में देखती थी। वह गुरुकुल से निकलना चाहती थी। कैसे निकला जाये इस पर सोचती रहती थी। आधी-आधी रात को गुरुकुल की छत पर घूमती रहती थी।

जाने से कुछ दिन पूर्व बोलती थीः मुझे अपना नाम करना है। मैं इस गुरुकुल को बदनाम कर दूँगी। बदनामी होगी तो अपने-आप बंद हो जायेगा। फिर तो पिताजी को मुझे यहाँ से लेकर ही जाना पड़ेगा।

गुरुकुल को बदनाम करने के लिए उसने बापू जी को बदनाम करने का तरीका अपनाया। और विश्वविख्यात संत को बदनाम करने का सबसे आसान तरीका था – ʹचरित्रहनन।ʹ

आरोप लगाने वाली लड़की की एक सहेली ने बताया किः मैने उससे पूछा कि तूने बापू जी के ऊपर झूठा आरोप क्यों लगाया ? तो उसने बोलाः मेरे से जैसा बुलवाते हैं, वैसा मैं बोलती हूँ।

माँ बाप के साथ लड़की शाहजहाँपुर पहुँची। कुछ दिन बाद उसके भाई को पुलिस के द्वारा छिंदवाड़ा गुरुकुल से वापस बुलवाया गया। जाते समय लिखित तथा विडियो इंटरव्यू में उसने गुरुकुल के प्रति अपना सकारात्मक रवैया दिखाया। बाद में षड्यंत्रकारियों से मिलने पर उसने बयान दिया कि ʹगुरुकुल में भोजन नहीं दिया जाता, भूखा रखते हैं, केवल मांस-मच्छी खिलाते हैंʹ, जो कि सफेद झूठ है और सम्भव नहीं है। ये बिल्कुल झूठे आरोप लगवाये गये, जो वहाँ के मीडिया में आये। इस प्रकार के न जाने कैसे-कैसे झूठे आरोप लगवाये गये। षड्यन्त्रकारियों ने भाई बहन से ऐसा सफेद झूठ बुलवाया। ऐसे बयान से ही षड्यन्त्रकारियों की गंध प्रकट हो जाती है।

मेडिकल रिपोर्ट पूर्णतः सामान्य

आरोप करने वाली लड़की की मेडिकल जाँच रिपोर्ट में लिखा गया है कि उसके शरीर पर कहीं भी खरोंच, बाइट (दाँतों से काटने) के निशान नहीं हैं। उसके साथ कोई भी यौन-शोषण (सेक्सुअल एसॉल्ट) तथा शारीरिक शोषण (फिजिकल एसॉल्ट) नहीं हुआ है। मेडिकल रिपोर्ट पूर्णतः सामान्य होने के बावजूद भी रेप के लिए लगायी जाने वाली गैर-जमानती धारा 376 अभी भी लगी हुई है। लड़की ने भी अपने बयान में कहीं भी ʹरेप हुआʹ ऐसा नहीं कहा है।

कैसी मनगढ़ंक कहानी !

लड़की कहती हैः “बापू जी ने मुझे कमरे में बुलाया, मेरी माँ कमरे के बाहर बैठी हुई थी। बापू जी ने दरवाजा बंद करके मेरे कपड़े उतारने चाहे तो मैं चिल्लाने लगी तो मेरा मुँह बन्द कर दिया। डेढ़ घंटे तक मेरे शरीर पर हाथ घुमाते रहे। फिर मुझे कहाः ʹमाता-पिता को बताना नहीं। नहीं तो जान से मार डालूँगा।ʹ

डेढ़ घंटे के बाद मैं कमरे से बाहर आयी तो घबरायी हुई थी। माँ के साथ कुटिया के कम्पाउंड के बाहर ही जो साधक का घर है, उसमें चली गयी। मैंने अपने माता-पिता को कुछ नहीं बताया और सो गयी।ʹ

कैसी मनगढ़ंत बाते हैं ! जो कन्या बीमार है, इलाज हुआ, मानसिक विक्षिप्त है, उसे छिंदवाड़ा से शाहजहाँपुर व वहाँ से जोधपुर (2000 किलोमीटर से अधिक दूर) माँ-बाप के साथ बुलाकर और माँ कमरे के बाहर बैठी हो तो कोई साधारण या नासमझ आदमी भी कन्या का मुँह दबाकर डेढ़ घंटे तक शरीर के ऊपरी हिस्से पर हाथ घुमाता रहे, कुचेष्टा करता रहे पास में किसान का घर होने के अलावा माँ-बाप भी हों – ऐसा सम्भव नहीं है। माँ कुटिया के दरवाजे के बाहर बैठी है तो उसे लड़की के चिल्लाने की आवाज सुनायी क्यों नहीं दी ? डेढ़ घंटे तक जिसका यौन शोषण हुआ हो, ऐसी कथित 16-17 वर्ष की उम्र की लड़की जब माँ के सामने आती है तब क्या माँ को उसकी हालत देखकर मन में आशंका नहीं होगी ? और शोषण डेढ़ घंटे तक हुआ, यह लड़की को ऐसी परिस्थिति में कैसे पता चला ? क्या वह घड़ी देखकर अंदर गयी थी और आने के बाद भी घड़ी देख ली थी ?

लड़की बयान में लिखवाती है कि ʹमैं चुपचाप कमरे में जाकर माँ-बाप के साथ सो गयी।ʹ ऐसा होने पर कोई कैसे सो सकता है ? फिर सुबह किसान के बच्चों के साथ खेली व 200 रूपये भी दे गयी। कार से स्टेशन पहुँची। डेढ़ घंटे तक अगर उसका मुँह दबाया रहता, हाथ घूमता रहता, वह विरोध करती रहती तो क्या उसके शरीर पर कहीं भी कोई निशान नहीं होता ? डेढ़ घंटे दबाया हुआ मुँह देखकर उसकी माँ के मन में आशंका नहीं होती ?

कमरा बंद था। कुंडी लगायी थी। लाइट भी बंद थी। ऐसी स्थिति में डेढ़ घंटे तक लड़की अंदर रही तो वहीं बाहर बैठी माँ ने दरवाजा क्यों नहीं खटखटाया ? अथवा बाहर जो तथाकथित 3 लड़के खड़े कर दिये गये थे, उनसे क्यों नहीं पूछा ?

उस लड़की की मनगढ़ंत बातों के सिवाय पुलिस के पास घटना के बारे में क्या जानकारी है ? उसकी बातों की पुष्टि के लिए क्या प्रूफ है ? मेडिकल रिपोर्ट तो सामान्य ही है। घटना तो बताती है 15 अगस्त की और एफ आर  आई दर्ज हुई 20 को। ऐसा क्यों ? लड़की उत्तर प्रदेश की, पढ़ रही थी छिंदवाड़ा (मध्य प्रदेश) में, तथाकथित घटना जोधपुर (राजस्थान) की बता रही है और फिर एफ आई आर दिल्ली में रात 2-45 बजे क्यों ? वह भी कमला मार्केट पुलिस थाना ही क्यों ? अगर वे उत्तर प्रदेश से ट्रेन, बस या हवाई जहाज से भी दिल्ली पहुँचते तो भी कमला मार्केट से पहले 3 मुख्य पुलिस थाने मेन रोड पर आते हैं। वहाँ क्यों नहीं की गयी एफ आई आर ? उनकी हर चाल पर कई सवाल खड़े होते हैं।

जो भारतीय संस्कृति के प्रचार-प्रसार, समाज की व्यापक सेवा, बालक, युवाओं व महिलाओं के उत्थान, रोगग्रस्तों के उपचार, गरीबों हेतु भंडारे, हर प्रकार की प्राकृतिक आपदाओं में राहतकार्य आदि में 50 वर्षों से लगे हुए हैं, ऐसे एक अत्यन्त लोकप्रिय महान संत को, एक कथित 16-17 वर्ष की लड़की की आधारहीन, एक भी पुख्ता सबूत से रहित बातों के आधार पर क्या पुलिस जेल भेज सकती है ? तो इन सबके पीछे क्या राजनीति है ? हिन्दू धर्म की जड़ें काटना ? लोगों की धर्म से श्रद्धा हटाकर उन्हें धर्मपरिवर्तन के लिए प्रेरित करना ? भारत देश भारत तभी तक है, जब तक हिन्दू धर्म है। क्या वे धर्म को मिटाकर भारत देश को मिटाना चाहते हैं ? कई प्रश्न उठते हैं। प्रबुद्ध समाज को इस ओर गम्भीरता से ध्यान देना चाहिए। बेबुनियादी बातें फैलाकर टी आर पी बढ़ाने वाले मीडिया पर अंकुश लगाने वाले टोस कानून भारतीय संविधान में होने चाहिए। अन्यथा समाज दिग्भ्रमित हो जायेगा, धर्म और संतों पर से विश्वास खो बैठेगा। और ये केवल हिन्दू संतों पर ही आरोप क्यों लगते हैं ?  अपनी संस्कृति और धर्म से आस्था हटी तो सर्वनाश !

यतो धर्मः ततो जयः। यतो धर्मः ततो अभ्युदयः।

जब संत ही नहीं रहेंगे तो जीवन ही दिशाहीन हो जायेगा।

संत न होते तो जगत में, तो जल मरता संसार।

ब्रह्मज्ञानी महापुरुष अपार कष्ट, निंदा, अपमान सहते हुए भी लोक-कल्याण के कार्य में लगे ही रहते हैं। वह तो उनका स्वभाव ही होता है।

तरूवर सरोवर संतजन चौथा बरसे मेह।

परमारथ के कारणे चारों धरिया देह।।

स्रोतः ऋषि प्रसाद, सितम्बर 2013, अंक 249

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इष्ठनिष्ठा, दृढ़ता व आत्मविश्रांति से सफलता


हनुमानजी श्रीरामजी की आज्ञा से दूत बनकर सीताजी के पास लंका जा रहे थे। रास्ते में देवताओं, गंधर्वों आदि ने उनके बल, पराक्रम व सेवानिष्ठा की परीक्षा के लिए नागमाता सुरसा को प्रेरित किया। तब सुरसा ने विकराल राक्षसी का रूप बनाया और समुद्र लाँघ रहे हनुमान जी को घेरकर अट्टहास करने लगीः “हाઽઽઽ….. हाઽઽઽ…. हाઽઽઽ….. कपिश्रेष्ठ ! आज विधाता ने तुम्हें मेरा भोजन बनाया है, मैं तुम्हें नहीं छोड़ूँगी। तुम शीघ्र मेरे मुँह में आ जाओ।” ऐसा कहकर उसने अपना भयंकर मुँह खोला।

एक सच्चे सेवक के लिए स्वामी की सेवा, उनकी आज्ञा से बढ़कर कुछ नहीं होता। ʹराम काजु कीन्हें बिनु मोहि कहाँ बिश्राम।ʹ – ऐसी निष्ठावाले हनुमानजी ने नम्रतापूर्वक सुरसा से कहाः “देवी ! मैं श्रीराम जी की आज्ञा से लंका जा रहा हूँ। सीता जी के दर्शन कर राम जी से जब मिल लूँगा, तब तुम्हारे मुँह में आ जाऊँगा। यह तुमसे सच्ची प्रतिज्ञा करके कहता हूँ।”

सुरसा हँसने लगीः “नहीं अंजनीसुत ! मुझे विधाता ने वर दिया है कि ʹकोई तुम्हें लाँघकर आगे नहीं जा सकता।ʹ तुम्हें मेरे मुँह से प्रवेश करके ही आगे जाना होगा।”

एक ओर मृत्यु तो दूसरी ओर स्वामी की आज्ञा थी। ऐसी विकट परिस्थिति में भी हनुमान जी विचलित नहीं हुए बल्कि अपनी अंतर्यामी राम में शांत हो गये। तुरंत अंतर्प्रेरणा मिली और वे सुरसा से बोलेः “तो ठीक है, तुम अपना मुँह इतना विशाल बनाओ की मुझे समा सके।” सुरसा ने अपना मुँह 1 योजन (8मील या करीब 13 किलोमीटर) विस्तृत बना लिया तो हनुमानजी 10 योजन बड़े हो गये। यह देखकर सुरसा ने अपना मुँह 20 योजन जितना फैला दिया। तब हनुमान जी 30 योजन के हो गये। बढ़ते-बढ़ते हनुमानजी जब 90 योजन शरीरवाले हुए तब सुरसा ने अपने मुँह का विस्तार 100 योजन बना लिया, जो एक भयंकर नरक के समान दिख रहा था।

तब बुद्धिमान वायुपुत्र ने झट् से अपना शरीर अँगूठे जितना बनाया और तीव्र वेग से सुरसा के मुँह में प्रवेश कर बाहर निकल आये। वे सुरसा से बोलेः “नागमाता ! मैं तुम्हारे मुँह में प्रवेश करके आ चुका हूँ, इसके तुम्हारा वरदान भी सत्य हो गया। अब मैं श्रीरामजी की सेवा में जा रहा हूँ।”

हनुमानजी की स्वामीनिष्ठा और सेवा में तत्परता देखकर सुरसा ने अपने असली रूप में प्रकट होकर उनको सेवा में शीघ्र सफलता का आशीर्वाद दिया। हनुमानजी की अपने इष्ट की सेवा में निष्ठा एवं बुद्धि-चातुर्य देखकर सब देवता, गंधर्व आदि भी उनकी प्रशंसा करने लगे।

इस प्रकार पहले तो हम अपने जीवन में ऊँचा लक्ष्य बना लें, जैसे हनुमानजी ने लक्ष्य बनाया – अपने इष्ट, अपने आध्यात्मिक पथप्रदर्शक की निष्काम सेवा का। दूसरा, हम अपने उस सत्संकल्प, अपने उस ऊँचे लक्ष्य के प्रति इतने दृढ़ हो जायें कि हमारे भी जीवन में हनुमानजी की वह अडिगता, निष्ठा हर प्रकार से फूट निकले कि ʹप्राणिमात्र के परम हितैषी मेरे सर्वेश्वर का दैवी कार्य किये बिना मुझे विश्राम कहाँ ?ʹ और तीसरी बात, कार्य के बीच-बीच में एवं जब विकट परिस्थितियाँ आयें तब अपने हृदय में सत्ता-स्फूर्ति-सामर्थ्य के केन्द्र के रूप में सदैव विराजमान उस अंतर्यामी में थोड़ा शांत हो जायें, निःसंकल्प हो जायें। इससे दैवी कार्य को उत्तम ढंग से सम्पन्न करने की सुन्दर सूझबूझ व सत्प्रेरणा हमें मिलेगी। सब हमारी प्रशंसा भी कर लें तो भी हमारी अपनी देह में नहीं, अंतर्यामी में आत्मीयता, निष्ठा और सजगता सुदृढ़ होने से हम अपने ऊँचे लक्ष्य से गिर नहीं पायेंगे और केवल उस दैवी कार्य को ही नहीं, अपने जीवन को भी परम सफल बना लेंगे।

स्रोतः ऋषि प्रसाद, सितम्बर 2013, पृष्ठ संख्या 22,23 अंक 249

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