Gurubhaktiyog

सदगुरु तुम्हारा इंतजार कर रहे हैं


● ब्रह्मवेत्ता गुरु ने अपने सत्शिष्य पर कृपा बरसाते हुए कहाः “वत्स ! “तेरा मेरा मिलन हुआ है (तूने मंत्रदीक्षा ली है) तब से तू अकेला नहीं और तेरे मेरे बीच दूरी भी नहीं है। दूरी तेरे-मेरे शरीरों में हो सकती है, आत्मराज्य में दूरी की कोई गुंजाइश नहीं। आत्मराज्य में देश-काल की कोई विघ्न …

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गुरुभक्तों के अनूठे वरदान (बोध कथा)….


मैं तुमसे बहुत प्रसन्न हूँ मांगो तुम मुझसे कोई एक वर मांग लो यदि आपको अपने गुरु से ऐसे वचन सुनने को मिले तो आप वरस्वरूप उनसे क्या मांगेंगे? यह प्रस्ताव कितना लुभावना सा है हमे सोचने को मजबूर कर ही देता है। भोगी से योगी तक सभी इस पर विचार करते है फ़र्क बस …

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गुरु का प्रसाद….


जिज्ञासु ने कहा कि महात्मा जी गुरू से जो प्रसाद मिले, वह अगर अपने व्रत या दशा के विरुद्ध जाता हो तो उसे खाना चाहिए या नहीं । महात्मा जी ने कहा इसी बात को लेकर एक दिन बड़ी प्रश्नोत्तरी हो गई । एकादशी का दिन था, कोई सज्जन विद्वान पंडित हमारे गुरुदेव के पास …

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