Gurubhaktiyog

वे तुम्हें अगले जन्म में भी खोज लेंगे, निश्चिंत रहो (रमण महर्षि कथा)


सत्य के साधक को मन एवं इन्द्रियो पर संयम रखकर अपने आचार्य के घर रहना चाहिए और खूब श्रद्धा एवं आदरपूर्वक गुरु की निगरानी मे शास्त्रो का अभ्यास करना चाहिए उसी चुस्तता से ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए और आचार्य की पूजा करनी चाहिए शिष्य को चाहिए कि  वह आचार्य को साक्षात ईश्वर के रूप …

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पुत्र तुम्हें इसी कार्य के लिए चुना गया है….(समर्थ रामदास जी कथा)


सद्गुरु मे दृढ़ श्रध्दा आत्मा की उन्नति करती है, हृदय को शुद्ध करती है एवं आत्मसाक्षात्कार की ओर ले जाती है। गुरू मे संपूर्ण श्रध्दा रखो और अपने आपको पूर्णतः गुरु की शरण मे ले जाओ। वे आपकी निगरानी करेंगे, इससे सब भय अवरोध एवं कष्ट पूर्णतः नष्ट होगे। आचार्य प्रमाण के रूप मे जो …

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मस्त फकीर सिवली और जिज्ञासु की कथा


गुरु की महिमा गाने से उनका ईश्वरत्व हमारे हृदय में स्वयं प्रकट हो जाता है क्योंकि गुरु का स्वभाव स्वयं ईश्वर का स्वभाव होता है उसी स्वभाव के प्राप्ति हेतु ही मनीषियों ने ईश्वरोपासना का विधान किया है परन्तु वे लोग मेरे मत में अभागे ही रह जाते है जो साक्षात ईश्वर के चलते-फिरते स्वरूप …

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