‘मुझमें अहंकार नहीं’ यह जानना ही अहंकार है
महर्षि पराशर मैत्रेय को कहते हैं- “हे मैत्रेय ! सर्व अनर्थों को देने वाला जो देह आदि का अहंकार है, उसको जब तू जलायेगा (बाधित अर्थात् मिथात्व निश्चय करेगा) तब शेष जो पद रहेगा उसमें मन-वाणी का मार्ग नहीं, जो मैं वर्णन करूँ और तू सुने । परंतु देह को जलाने से सुख होता नहीं …