वे ज्ञान से वंचित रह जाते हैं
भगवान से प्रेम भी हो और मान भी रहे – ये दोनों बातें नहीं हो सकतीं । ज्ञान भी रहे व मान भी, यह भी सम्भव नहीं । संत तुलसी दास जी ने ज्ञान का स्वरूप बतलाया हैः ग्यान मान जहँ एकउ नाहीं । ज्ञान वह है जिसमें एक भी मान नहीं है । मान …