ऋषि प्रसाद

सांसारिक, आध्यात्मिक उन्नति, उत्तम स्वास्थ्य, साँस्कृतिक शिक्षा, मोक्ष के सोपान – ऋषि प्रसाद। हरि ओम्।

अस्थिर व नाशवान के झोंकों में कर सकते हो सहज योग


वैराग्य शतक के 37वें श्लोक का अर्थ हैः ‘हे बुद्धिमानो ! शरीरधारी प्राणियों के सुखभोग मेघों के विस्तार के बीच चमकने वाली बिजली के समान अस्थिर हैं । जीवन हवा के झोंकों से कम्पित कमल के पत्ते पर पड़े हुए जलबिंदु के समान नाशवान हैं। जवानी की उमंगे और वासनाएँ भी अत्यंत अस्थिर हैं । …

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दो घंटे की भूख ने बदला जीवन


18वीं शताब्दी की बात है । दक्षिण भारत में मदुरै शहर के एक ब्राह्मण परिवार में सोमनाथ योगी के घर में एक बालक का जन्म हुआ । नाम रखा गया शिवरामकृष्ण । उसे बाल्यकाल से ही भक्ति का रंग लग गया । माता-पिता ने उसे वेदांत-अध्ययन हेतु तिरुविसनल्लूरू के गुरुकुल में भेजा । 15 साल …

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इसे समुद्र में फिंकवा दीजिये


(सुभाषचन्द्र बोस जयन्तीः 23 जनवरी 2019) नेता जी सुभाषचन्द्र बोस सिंगापुर गये थे । वहाँ के निवास-कक्ष हेतु उन्होंने अपने सचिव हसन को टेबल लैम्प लाने को कहा । उसने बाजार से मँगवाकर नेता जी को मेज पर रख दिया । नेता जी जब अपने कक्ष में आये तो लैम्प देखकर उनके माथे पर सिलवटें …

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