बस, तीव्र विवेक होना चाहिए-पूज्य बापू जी
विवेक किसको बोलते हैं ? दो चीजें मिल गयी हों, मिश्रित हो गयी हों उनको अलग करने की कला का नाम है विवेक। परमात्मा चेतन है, जगत जड़ है और दोनों के मिश्रण से सृष्टि चलती है। सृष्टि में सुख-दुःख, लाभ-हानि, अच्छा-बुरा, जीवन-मरण-यह सब मिश्रित हो गया है। उनमें से सार-असार को, नित्य अनित्य को, …