ऋषि प्रसाद

सांसारिक, आध्यात्मिक उन्नति, उत्तम स्वास्थ्य, साँस्कृतिक शिक्षा, मोक्ष के सोपान – ऋषि प्रसाद। हरि ओम्।

बस, तीव्र विवेक होना चाहिए-पूज्य बापू जी


विवेक किसको बोलते हैं ? दो चीजें मिल गयी हों, मिश्रित हो गयी हों उनको अलग करने की कला का नाम है विवेक। परमात्मा चेतन है, जगत जड़ है और दोनों के मिश्रण से सृष्टि चलती है। सृष्टि में सुख-दुःख, लाभ-हानि, अच्छा-बुरा, जीवन-मरण-यह सब मिश्रित हो गया है। उनमें से सार-असार को, नित्य अनित्य को, …

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एक नाव में सवार होने वाले तो तरते हैं लेकिन…


बाबा फरीद नाम के एक सूफी फकीर हो गये। वे अनन्य गुरुभक्त थे। गुरु जी की सेवा में ही उनका सारा समय व्यतीत होता था। एक बार उनके गुरु ख्वाजा कुतुबुद्दीन बख्तियार ने उनको किसी खास काम के लिए मुलतान भेजा। वहाँ उन दिनों में शाह शम्स तबरेज के शिष्यों ने अपने गुरु के नाम …

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ईश्वर व गुरु के कार्य में मतभेदों को आग लगाओ


पूज्य बापू जी अगर चित्र में संदेह होगा तो गुरुकृपा के प्रभाव का तुम पूरा फायदा नहीं उठा पाओगे। तुम्हें भले चारों तरफ से असफलता लगती हो लेकिन गुरु ने कहा कि ‘जाओ, हो जायेगा’ तो यह असफलता सफलता में बदल जायेगी। तुम्हारे हृदय से हुंकार आता है कि ‘मैं सफल हो ही जाऊँगा !’ …

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