ऐसा वैभव है आत्मदेव का ! पूज्य बापू जी
पूज्य बापू जी का 55वाँ आत्मसाक्षात्कार दिवस 10 अक्तूबर 2018 यह प्रपंच मिथ्या है। प्रपंच क्यों बोलते हैं ? जैसे भेल पूड़ी में सब एकत्र कर देते हैं न, ऐसे पाँच भूतों का आधा-आधा हिस्सा तो अलग रहा, बाकी आधा हिस्सा मिश्रित किया। उसी से प्रपंच बना। जल में भी पृथ्वी के कण मिल जायेंगे, …