ऋषि प्रसाद

सांसारिक, आध्यात्मिक उन्नति, उत्तम स्वास्थ्य, साँस्कृतिक शिक्षा, मोक्ष के सोपान – ऋषि प्रसाद। हरि ओम्।

ॐ पूज्य बापू जी का पावन संदेश


ऋग्वेद का वचन है, उसे पक्का करें- युष्माकम् अन्तरं बभूव। नीहारेण प्रावृता… ‘वह सृष्टिकर्ता आत्मदेव तुम्हारे भीतर ही है और अज्ञानरूपी कोहरे से ढका है।’ हे मनुष्यो ! अपना असली खजाना अपने पास है। जहाँ कोई दुःख नहीं, कोई शोक नहीं, कोई भय नहीं ऐसा खजाना तो अपने आत्मदेव में है। तुम (अज्ञानरूपी कोहरे को …

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मोहरूपी दलदल से पार हो जाओ-पूज्य बापू जी


भगवान गीता (2.52) में कहते हैं- यदा ते मोहकलिलं बुद्धिर्व्यतितरिष्यति। तदा गन्तासि निर्वेदं श्रोतव्यस्य श्रुतस्य च।। जब तुम्हारी बुद्धि मोहरूपी (अज्ञानरूपी) दलदल से भली प्रकार पार हो जायेगी तब तुम सुने हुए और सुनने में आने वाले इस लोक और परलोक संबंधी सभी भोगों से उपराम हो जाओगे और परम पद  में ठहर जाओगे। दलदल …

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भक्तों की भक्ति को कैसे पुष्ट करते हैं भगवान व गुरु !


पूज्य बापू जी भगवान रामानुजाचार्यजी के शिष्य थे अनंतालवार (अनंतालवान)। वे तिरुपति (आंध्र प्रदेश) में रहते थे। वहाँ तिरुमला की पहाड़ी पर भगवान वेंकटेश्वर का मंदिर था। डाकू-चोर के भय से लोग सूरज उगने के बाद ही वहाँ जाते थे और शाम को आ जाते थे लेकिन रामानुजाचार्यजी ने अपने शिष्य को आदेश दियाः “आलवार …

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