ऋषि प्रसाद

सांसारिक, आध्यात्मिक उन्नति, उत्तम स्वास्थ्य, साँस्कृतिक शिक्षा, मोक्ष के सोपान – ऋषि प्रसाद। हरि ओम्।

दरिद्रता कैसे मिटे और ‘पृथ्वी के देव’ कौन ?


एक निर्धन व्यक्ति ने महात्मा बुद्ध से पूछाः “मैं इतना गरीब क्यों हूँ ?” बुद्ध ने कहाः “तुम गरीब हो क्योंकि तुमने देना नहीं सीखा।” “महात्मन ! लेकिन मेरे पास तो देने के लिए कुछ भी नहीं है।” “तुम्हारे पास देने को बहुत कुछ है। तुम्हारा चेहरा एक निर्दोष मुस्कान दे सकता है, तुम्हारा मुख …

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विजयी होने का संदेश देती है विजयादशमी-पूज्य बापू जी


(विजयदशमी, दशहराः 18 व 19 अक्तबूर 2018) लौकिक विजय वही होती है जहाँ पुरुषार्थ और चेतना होती है। आध्यात्मिक विजय भी वहीं होती है जहाँ सूक्ष्म विचार होते हैं, बुद्धि की सूक्ष्मता होती है, चित्त की शांत दशा होती है। तो आध्यात्मिक और लौकिक – दोनों प्रकार की विजय प्राप्त करने का संदेश विजयदशमी देती …

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युवाओं की एक बड़ी समस्या व उसका समाधान


भगवत्पाद साँईं श्री लीलाशाह जी महाराज कई नौजवान यह पूछ रहे हैं कि ‘हम प्रयत्न करते हुए भी स्वप्नदोष को रोक नहीं पाते हैं, इसके लिए क्या करना चाहिए ?’ पहले यह समझना चाहिए कि स्वप्नदोष क्या है ? ‘स्वप्नदोष‘ का अर्थ है नींद में स्वयं को रोक न पाना तथा वीर्य का पात होना …

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