संस्कृतिप्रेमी व साधक क्या करें ?
अपने अनुभव का आदर करें। आपके अंदर सत्यस्वरूप अंतर्यामी चैतन्य जगमगा रहा है। अपने उस सद्ज्ञानस्वरूप के अनुभव की निर्मल आँख से सच्चाई को जानें। धर्म, संस्कृति व समाज के हित में पूरा जीवन लगाने वाले करूणासिंधु संतों-महापुरुषों के प्रति किसी अन्य की मान्यता या दृष्टि के आधार पर कोई धारणा न बनायें। अपना जीवन …