ऋषि प्रसाद

सांसारिक, आध्यात्मिक उन्नति, उत्तम स्वास्थ्य, साँस्कृतिक शिक्षा, मोक्ष के सोपान – ऋषि प्रसाद। हरि ओम्।

संस्कृतिप्रेमी व साधक क्या करें ?


अपने अनुभव का आदर करें। आपके अंदर सत्यस्वरूप अंतर्यामी चैतन्य जगमगा रहा है। अपने उस सद्ज्ञानस्वरूप के अनुभव की निर्मल आँख से सच्चाई को जानें। धर्म, संस्कृति व समाज के हित में पूरा जीवन लगाने वाले करूणासिंधु संतों-महापुरुषों के प्रति किसी अन्य की मान्यता या दृष्टि के आधार पर कोई धारणा न बनायें। अपना जीवन …

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सौंदर्य, शक्ति और कर्मण्यता के पीछे कौन है ?


यह सौंदर्य या शोभा, चेष्टा, सजीवता और उत्साह क्या वस्तु है ? क्या वह आँख, कान या नाक के कारण है ? नहीं, नेत्र-कान इत्यादि में तो वह प्रकट होती ह। सुंदरता, शोभा आपके भीतर के परमेश्वर से मिलती है, और किसी दूसरी चीज से नहीं। वह चेतनता है। चेतनता, उद्योगशक्ति या गति जिसके कारण …

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भगवान से क्या माँगें ?


-भगवत्पाद साँईं श्री लीलाशाह जी महाराज एक विद्यार्थी ने मेरे पास आकर कहाः “स्वामी जी ! आप कह रहे थे कि ‘ईश्वर हमसे अलग नहीं हैं।’ जब वे अलग नहीं हैं तो फिर माँगें किससे व क्या माँगें ?” मैंने कहाः “अच्छा प्रश्न पूछा है।” इस समय हमारे देश में रजोगुण बढ़ गया है। देश …

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