किनके लिए महात्मा सुलभ और किनके लिए दुर्लभ ? – पूज्य बापू जी
एक महात्मा सत्संग में कहा करते थे कि महात्मा सुलभ भी हैं और दुर्लभ भी। सज्जनों, श्रद्धालुओं के लिए महात्मा सुलभ हैं और दुर्जनों के लिए वे दुर्लभ हो जाते हैं। क्योंकि दुर्जन लोग महात्मा को देखकर भी अपनी दुष्ट वृत्ति से उनमें दोष ढूँढेंगे, उनमें अश्रद्धा हो ऐसा तर्क-वितर्क करेंगे। दुष्ट वृत्ति, आलोचना वृत्ति, …