ऋषि प्रसाद

सांसारिक, आध्यात्मिक उन्नति, उत्तम स्वास्थ्य, साँस्कृतिक शिक्षा, मोक्ष के सोपान – ऋषि प्रसाद। हरि ओम्।

किनके लिए महात्मा सुलभ और किनके लिए दुर्लभ ? – पूज्य बापू जी


एक महात्मा सत्संग में कहा करते थे कि महात्मा सुलभ भी हैं और दुर्लभ भी। सज्जनों, श्रद्धालुओं के लिए महात्मा सुलभ हैं और दुर्जनों के लिए वे दुर्लभ हो जाते हैं। क्योंकि दुर्जन लोग महात्मा को देखकर भी अपनी दुष्ट वृत्ति से उनमें दोष ढूँढेंगे, उनमें अश्रद्धा हो ऐसा तर्क-वितर्क करेंगे। दुष्ट वृत्ति, आलोचना वृत्ति, …

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आँधी तूफान सह के भी पुण्यात्मा सेवा करते हैं – पूज्य बापू जी


तुम्हारे साथ यह संसार कुछ अन्याय करता है, तुमको बदनाम करता है, निंदा करता है तो यह संसार की पुरानी रीत है। हीनवृत्ति, कुप्रचार, निंदाखोरी यह आजकल की ही बात नहीं है लेकिन कुप्रचार के युग में सुप्रचार करने का साहस लल्लू-पंजू का नहीं होता है। महात्मा बुद्ध के सेवकों का नाम सुनकर लोग उन्हें …

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भगवान या गुरु अंतर्यामी हैं तो ऐसा क्यों ?


भगवान कहते हैं- दैवी ह्येषा गुणमयी मम माया दुरत्यया। मामेव ये प्रपद्यन्ते मायामेतां तरन्ति ते।। ‘यह अलौकिक अर्थात् अति अद्भुत त्रिगुणमयी मेरी माया बड़ी दुस्तर है परंतु जो पुरुष केवल मुझको ही निरन्तर भजते हैं, वे इस माया को उल्लंघन कर जाते हैं अर्थात् संसार से तर जाते हैं।’ (गीताः 7.14) हे अर्जुन ! मुझ …

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