सत्संगति ही है भगवत्प्राप्ति का सर्वश्रेष्ठ साधन
भगवान श्रीकृष्ण उद्धवजी से कहते हैं- “उद्धव! जो लोग बारह यमों (अहिंसा, सत्य, अस्तेय (चोरी न करना), असंगता, असंचय (आवश्यकता से अधिक धन आदि का संग्रह न करना), आस्तिकता, ब्रह्मचर्य, मौन, स्थिरता, क्षमा और अभय) और बारह नियमों (बाह्य पवित्रता (शुद्धि), आंतरिक पवित्रता (विवेक द्वारा), जप, तप, हवन, श्रद्धा, अतिथि-सेवा, भगवत्पूजा, तीर्थयात्रा, परोपकार की चेष्टा, …