ऋषि प्रसाद

सांसारिक, आध्यात्मिक उन्नति, उत्तम स्वास्थ्य, साँस्कृतिक शिक्षा, मोक्ष के सोपान – ऋषि प्रसाद। हरि ओम्।

सत्संगति ही है भगवत्प्राप्ति का सर्वश्रेष्ठ साधन


भगवान श्रीकृष्ण उद्धवजी से कहते हैं- “उद्धव! जो लोग बारह यमों (अहिंसा, सत्य, अस्तेय (चोरी न करना), असंगता, असंचय (आवश्यकता से अधिक धन आदि का संग्रह न करना), आस्तिकता, ब्रह्मचर्य, मौन, स्थिरता, क्षमा और अभय) और बारह नियमों (बाह्य पवित्रता (शुद्धि), आंतरिक पवित्रता (विवेक द्वारा), जप, तप, हवन, श्रद्धा, अतिथि-सेवा, भगवत्पूजा, तीर्थयात्रा, परोपकार की चेष्टा, …

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श्राद्ध-महिमा


एवं पितरों को तृप्त व प्रसन्न करने के उपाय (श्राद्धपक्षः 5 सितम्बर 2017 से 20 सितम्बर 2017 तक) श्रद्धया दीयते यत्र तच्छ्राद्धं परिचक्षते। ‘श्रद्धा से जो पूर्वजों के लिए किया जाता है, उसे ‘श्राद्ध’ कहते हैं।’ ‘पद्म पुराण’ में आता हैः ‘श्राद्ध से प्रसन्न हुए पितर आयु, पुत्र, धन, विद्या, राज्य, लौकिक सुख, स्वर्ग तथा …

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राठौर-केसरी वीर दुर्गादास


मुगल शासन के समय की बात है। जोधपुर के महाराज जसवंत सिंह वीरगति को प्राप्त हो गये थे और उस समय वहाँ कोई राजा न होने के कारण औरंगजेब ने जोधपुर को अपने शासन में लेने के प्रयास किये। परंतु उस समय जसवंत सिंह के पुत्र राजकुमार अजीत सिंह के संरक्षक थे सनातन धर्म व …

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