ऋषि प्रसाद

सांसारिक, आध्यात्मिक उन्नति, उत्तम स्वास्थ्य, साँस्कृतिक शिक्षा, मोक्ष के सोपान – ऋषि प्रसाद। हरि ओम्।

ब्रह्मज्ञानी साक्षात् ब्रह्म ही हैं


पूज्य संत श्री आशाराम जी बापू का 54वाँ आत्मसाक्षात्कार दिवसः 21 सितम्बर मुंडकोपनिषद् (3.2.1) में आता हैः स यो ह वै तत्परमं ब्रह्म वेद ब्रह्मैव भवति नास्याब्रह्मवित्कुले भवति। ‘निश्चय ही जो कोई उस परम ब्रह्म-परमात्मा को जान लेता है वह ब्रह्म ही हो जाता है। उसके कुल में (अर्थात् संतानों में) कोई भी मनुष्य ब्रह्म …

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स्वास्थ्यवर्धक हितकारी भोजन कैसा हो ?


सात्त्विक आहार से जीवन में सात्त्विकता और राजसिक-तामसिक आहार से आचरण में स्वार्थपूर्ण एवं पाशविक वृत्तियाँ बढ़ती हैं। हमारा आहार कैसा हो इस संबंध में नीचे कुछ बिंदु दिये जा रहे हैं। भोजन नैतिक हो अनैतिक स्रोतों से धन द्वारा निर्मित भोजन करने से मन में अशांति, भय, अस्थिरता रहती है, जिससे शरीर की रोगप्रतिरोधक …

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सर्वपापनाशक, सर्वहितकारी, मंगलमय मंत्र-विज्ञान


पूज्य बापू जी के सत्संग-अमृत में आता हैः “ॐकार का, भगवन्नाम जप करने से आपको स्वास्थ्य के लिए दुनियाभर की दवाइयों, टॉनिकों, कैप्सूलों और इंजेक्शनों की शरण नहीं लेनी पड़ेगी। भक्तिरस से ही स्वास्थ्य बना रहता है। खुशी के लिए क्लबों में जूठी शराब, जूठे डिनरों का सहारा नहीं लेना पड़ता। भगवान का नाम लेना …

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