आशा का त्याग ही सर्वोपरि
आशा नाम नदी मनोरथजला तृष्णातरङ्गाकुला। रागग्राहवती वितर्कविहगा धैर्यद्रुमध्वंसिनी। मोहावर्तसुदुस्तराऽतिगहना प्रोत्तुङ्गचिन्तातटी तस्याः पारगता विशुद्धमनसो नन्दति योगीश्वराः।। (वैराग्य शतकः10) ‘अच्छा खान-पान, विहार आदि मानसिक इच्छारूप जलवाली, अप्राप्य वस्तु की प्राप्ति की इच्छारूप तृष्णा की तरंगों से पूर्ण, अभीष्ट पदार्थ का प्रेमरूप राग व द्वेष आदि घड़ियाल वाली, ‘अमुक वस्तु कब, कैसे मिलेगी ?’ इत्यादि विचाररूप जलपक्षियों से …