ऋषि प्रसाद

सांसारिक, आध्यात्मिक उन्नति, उत्तम स्वास्थ्य, साँस्कृतिक शिक्षा, मोक्ष के सोपान – ऋषि प्रसाद। हरि ओम्।

आठ प्रकार के सुखों से भी ऊँचा सुख


पूज्य बापू जी आठ प्रकार के सुख होते हैं। देखने, सूँघने, चखने, सुनने और स्पर्श का सुख – ये पाँच विषय सुख हुए। दूसरा, मान मिलता है तो सुख होता है, अपनी कहीं बड़ाई हो रही हो तो सुख होता है। अगर आपको बढ़िया आराम मिल रहा हो तो सुख होता है। तो शब्द, स्पर्श, …

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कफदोष का प्रकोप व शमन


(वसंत ऋतु (19 फरवरी से 18 अप्रैल तक) हेतु विशेष वसंत ऋतु में कफ कुपित रहता है। मधुर, नमकीन, चिकनाईयुक्त, शीत, भारी व ज्यादा आहार कफ उत्पन्न करता है। उड़द, तिल, सरसों, ककड़ी, खीरा, भिंडी, सूखे मेवे, सिंघाड़ा, सेब, अनानास, अमरूद, सीताफल, गन्ना, भैंस का दूध, मैदे के पदार्थ, दही, घी, मक्खन, मिश्री आदि कफ …

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शिव का रूप देता अनुपम संदेश


‘शिव’ माना कल्याणस्वरूप। भगवान शिव तो हैं ही प्राणिमात्र के परम हितैषी, परम कल्याणकारक लेकिन उनका बाह्य रूप भी मानवमात्र को मार्गदर्शन प्रदान करने वाला है। शिवजी का निवास हिमालय का कैलास पर्वत बताया गया है। ज्ञानी की स्थिति ऊँची होती है, हृदय में शांति व विशालता होती है। ज्ञान हमेशा ऊँचे केन्द्रों में रहता …

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