ऋषि प्रसाद

सांसारिक, आध्यात्मिक उन्नति, उत्तम स्वास्थ्य, साँस्कृतिक शिक्षा, मोक्ष के सोपान – ऋषि प्रसाद। हरि ओम्।

भक्त या संत को सताने का फल


  ‘अदभुत रामायण’ में एक प्रसंग आता है, जिसे महर्षि वाल्मीकि जी ने समस्त पापों को हरने वाला और शुभ बताया है। मानस पर्वत की कोटर में एक उल्लू रहता था, जो देवताओं, विद्याधरों, गंधर्वों और अप्सराओं का गायनाचार्य था। वह किस प्रकार गायनाचार्य के पद पर प्रतिष्ठित हुआ इस बारे  में देवर्षि नारद जी …

Read More ..

जब देवी ने ली दीक्षा


श्री नाभा जी महाराज कृत ‘भक्तमाल’ में कथा आती है कि श्री हरिव्यास जी संतों के साथ विचरण करते हुए चटथावल नामक ग्राम पहुँचे। वहाँ एक सुंदर वाटिका देख के वहीं अपना नित्य-नियम करके भोजन प्रसाद ग्रहण करने का विचार कर रहे थे। तभी वाटिका में देवी के मंदिर पर किसी ने बकरा मार के …

Read More ..

सदगुरु से ही ब्रह्म को ब्रह्मत्व प्राप्त होता है


संत एकनाथ जी महाराज सदगुरु स्तुति करते हुए लिखते हैं- ‘हे सदगुरु परब्रह्म ! तुम्हारी जय हो ! ब्रह्म को ‘ब्रह्म’ यह नाम तुम्हारे कारण ही प्राप्त हुआ है। हे देवश्रेष्ठ गुरुराया ! सारे देवता तुम्हारे चरणों में प्रणाम करते हैं। हे सदगुरु सुखनिधान ! तुम्हारी जय हो। सुख को सुखपना भी तुम्हारे कारण ही …

Read More ..