ऋषि प्रसाद

सांसारिक, आध्यात्मिक उन्नति, उत्तम स्वास्थ्य, साँस्कृतिक शिक्षा, मोक्ष के सोपान – ऋषि प्रसाद। हरि ओम्।

अमृतवेला किसको बोलते हैं ?- पूज्य बापू जी


चार अमृतवेलाएँ हैं। एक सूरज उगने के सवा दो घंटे पहले से सूर्योदय तक (ब्राह्ममुहूर्त का समय) काल-दृष्टि से अमृतवेला है। दूसरी देश (स्थान) की दृष्टि से अमृतवेला है। जिस देश में, जिस जगह में सत्संग, ध्यान, भजन होता हो, वहीं हम ध्यान-भजन करते हैं तो वह अमृतवेला है। तीसरी अमृतवेला है संग की दृष्टि …

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आशाओं के दास नहीं आशाओं के राम हो जाओगे


  पूज्य बापू जी मन में कुछ आया और वह कर लिया तो इससे आदमी अपनी स्थिति में गिर जाता है लेकिन शास्त्र-सम्मत जीवन जीकर, सादगी और संयम से रह के आवश्यकताओं को पूरी करे, मन के संकल्प-विकल्पों को काटता रहे और आत्मा में टिक जाये तो वह आशारहित पद में, आत्मपद में स्थित हो …

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आखिर कर्ण क्यों हारा ?


पूज्य बापू जी ऋषि आश्रम में शिष्यों के बीच चर्चा छिड़ गयी कि ‘अर्जुन के बल से कर्ण में बल ज्यादा था। बुद्धि भी कम नहीं थी। दानवीर भी बड़ा भारी था फिर भी कर्ण हार गया और अर्जुन जीत गये, इसमें क्या कारण था ?’ कोई निर्णय पर नहीं पहुँच रहे थे, आखिर गुरुदेव …

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