ऋषि प्रसाद

सांसारिक, आध्यात्मिक उन्नति, उत्तम स्वास्थ्य, साँस्कृतिक शिक्षा, मोक्ष के सोपान – ऋषि प्रसाद। हरि ओम्।

सुषुप्ति में होता है सत् से ऐक्य


स्वामी श्री अखण्डानंद जी सरस्वती मन बुद्धि के उपराम होने पर सत् का प्रतिबिम्ब जो जीवात्मा है, वह कहाँ चला जाता है ? वह अपने प्रकाशस्वरूप सत्-देवता में ही मिल जाता है। मन की उपशांति में आत्मा परमात्मा से एक हो जाता है। यही बात समझाने के लिए आरूणि ने कहाः “तुम स्वप्नांत अर्थात् सुषुप्ति …

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सर्वफलप्रद साधनः भगवन्नाम-जप – पूज्य बापू जी


भगवन्नाम का बड़ा भारी प्रभाव है। सारे पापों के समूह को नाश करने वाला है भगवान का नाम। जैसे लकड़ी में अग्नि तो व्याप्त है लेकिन छुओ तो वह गर्म नहीं लगेगी, वातावरण के अनुरूप लगेगी। सर्दी में सुबह-सुबह लकड़ी को छुओ तो ठंडी लगती है। आँखों से अग्नि दिखेगी नहीं, छूने से भी महसूस …

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संस्कृति रक्षक महापुरुषों पर कितने हुए प्रहार !


जिस समय इस देश में आद्य शंकराचार्य जी का आविर्भाव हुआ था उस समय असामाजिक तत्त्व अनीति, शोषण, भ्रम तथा अनाचार के द्वारा समाज को गलत दिशा में ले जा रहे थे। समाज में फैली इस अव्यवस्था को देखकर बालक शंकर का हृदय काँप उठा। उसने प्रतिज्ञा की कि “मैं राष्ट्र के धर्मोद्धार के लिए …

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