ऋषि प्रसाद

सांसारिक, आध्यात्मिक उन्नति, उत्तम स्वास्थ्य, साँस्कृतिक शिक्षा, मोक्ष के सोपान – ऋषि प्रसाद। हरि ओम्।

जब रघुराई बने ‘सेन नाई’ – पूज्य बापू जी


‘भक्तमाल’ में एक कथा आती हैः बघेलखंड के बांधवगड़ में राजा वीरसिंह का राज्य था । वीरसिंह बड़ा भाग्यशाली रहा होगा क्योंकि भगवन्नाम का जप करने वाले, परम संतोषी एवं उदार सेन नाई उसकी सेवा करते थे । सेन नाई भगवद्भक्त थे । उनके मन में मंत्रजप निरंतर चलता ही रहता था । संत-मंडली ने …

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कष्ट-मुसीबतों को पैरों तले कुचलने की कला


कष्ट-मुसीबतें और प्रतिकूलताएँ तो सभी के जीवन में आती हैं, संत-महापुरुषों व अवतारों के जीवन में तो प्रतिकूल परिस्थितियों की खूब अधिकता देखने में आती है किंतु सामान्य व्यक्ति और उनके जीवन में इतना ही अंतर देखने में आता है कि उन परिस्थितियों में मन की विचारधारा और बुद्धि की निष्ठा दोनों की अलग-अलग होती …

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नित्य गुरुज्ञान में रमण करो ! – पूज्य बापू जी


जीवन में उतार-चढ़ाव तो आते रहते हैं । राग-द्वेष अनादि काल से है, वह भी तुम्हें झकझोरता होगा लेकिन तुम अपना लक्ष्य बना लो कि ‘जैसे मेरे सद्गुरु हर परिस्थिति में सम हैं, शांत हैं सजग हैं, सस्नेह हैं, सविचार हैं, ससत् हैं, सचित् हैं, सानंद हैं अर्थात् सत् के साथ, चेतन के साथ, आनंद …

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