ऋषि प्रसाद

सांसारिक, आध्यात्मिक उन्नति, उत्तम स्वास्थ्य, साँस्कृतिक शिक्षा, मोक्ष के सोपान – ऋषि प्रसाद। हरि ओम्।

आप कहते हैं…. – निर्दोष, निष्कलंक बापू


श्री निलेश सोनी (वरिष्ठ पत्रकार) प्रधान सम्पादक, ‘ओजस्वी है भारत !’ किसी ने ठीक ही लिखा है कि हिन्दू तो वह बूढ़े काका का खेत है, जिसे जो चाहे जब जोत जाय। उदार, सहिष्णु और क्षमाशील इस वर्ग के साथ वर्षों से बूढ़े काका के खेत की तरह बर्ताव हो रहा है। हिन्दू समाज का …

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वह अधीनता जिससे परम स्वाधीनता – पूज्य बापू जी


पंचभौतिक शरीर माया का है, मन, बुद्धि, अहंकार भी माया है, यह अष्टधा प्रकृति है। भगवान बोलते हैं कि ʹयह अष्टधा प्रकृति मैं नहीं हूँ, तो तुम भी यह नहीं हो।ʹ भगवान के वचन मान लो। भूमिरापोઽनलो वायुः खं मनो बुद्धिरेव च। अहंकार इतीयं मे भिन्ना प्रकृतिरष्टधा।। गीताः 7.4 ये प्रकृति, पंचभौतिक शरीर, मन, बुद्धि, …

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तौबा-तौबा ! कैसी दुःखदायी है ममता ! – पूज्य बापू जी


तुलसी ममता राम सौं, समता सब संसार। ममता अगर करनी है तो अंतर्यामी प्रभु से करो। ʹबेटे का क्या होगा, बेटी का क्या होगा, दुकान का क्या होगा, फलाने का क्या होगा, फलानी का क्या होगा ?ʹ ऐसा सोचते रहने वाले दुःखी होकर मर जाते हैं। फिर कहाँ जायेंगे, कौन सी योनि में भटकेंगे कोई …

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