ऋषि प्रसाद

सांसारिक, आध्यात्मिक उन्नति, उत्तम स्वास्थ्य, साँस्कृतिक शिक्षा, मोक्ष के सोपान – ऋषि प्रसाद। हरि ओम्।

सत्संग करे सुख-दुःख से पार – पूज्य बापू जी


भगवान श्री कृष्ण कहते हैं- सुखं वा यदि वा दुःखं से योगी परमो मतः। सुखद अवस्था आये चाहे दुःखद अवस्था आये, जो सुख और दुःख से परे मुझ साक्षी में, मुझ आत्मा में विश्रांति पा लेता है उस योगी की बुद्धि परम बुद्धि है। जो निगुरे लोग होते हैं, जिनकी अल्प मति होती है, जिनके …

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लाबयान है ब्रह्मवेत्ताओं की महिमा – पूज्य बापू जी


सदगुरु मेरा सूरमा, करे शब्द की चोट। मारे गोला प्रेम का, हरे भरम की कोट।। सदगुरु की करूणा तो करूणा है ही, उनकी डाँट भी उनकी करूणा ही है। गुरु कब, कहाँ और कैसे तुम्हारे अहं का विच्छेद कर दें, यह कहना मुश्किल है। श्रद्धा ही गुरु एवं शिष्य के पावन संबंध को बचाकर रखती …

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मनमुखता मिटाओ, मुक्ति पाओ


ʹश्री योग वासिष्ठ महारामायणʹ में वसिष्ठजी कहते हैं- हे राम जी ! जिस शिष्य को गुरु के वचनों में आस्तिक भावना होती है, उसका शीघ्र कल्याण होता है। पूज्य बापू जीः हाँ, गुरु के वचनों में आस्तिक भावना…. गुरु जी ने कहा है, बस ! शबरी भीलन को मतंग ऋषि ने कहाः “शबरी तू यहीं …

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