ऋषि प्रसाद

सांसारिक, आध्यात्मिक उन्नति, उत्तम स्वास्थ्य, साँस्कृतिक शिक्षा, मोक्ष के सोपान – ऋषि प्रसाद। हरि ओम्।

आत्ममहिमा में जगाने वाला पर्वःगुरूपूनम – पूज्य बापू जी


जन्म-जन्मांतर तक भटकाने वाली बुद्धि को बदलकर ऋतम्भरा प्रज्ञा बना दें, रागवाली बुद्धि को हटाकर आत्मरति वाली बुद्धि पैदा कर दें, ऐसे कोई सदगुरु मिल जायें तो वे अज्ञान का हरण करके, जन्म-मरण के बंधनों को काटकर तुम्हें स्वरूप में स्थापित कर देते हैं। आज तक तुमने दुनिया का जो कुछ भी जाना है, वह …

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सृष्टियों का कोई पार नहीं – पूज्य बापू जी


शास्त्रों में इस जगत की पोल खोलने की बात आती है। ʹगर्ग संहिताʹ में आता है कि एक बार इन्द्र, ब्रह्माजी और शंकर जी गोलोक चले गये। गोलोक में राधाजी का ही राज्य है और सब महिलाओं के हाथ में ही सत्ता है। वहाँ की मुखिया भी महिला, मंत्री और चपरासी भी महिला, जासूसी विभाग …

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सर्व धर्म समान ?


सनातन धर्म के प्रति हिन्दुओं की आस्था नष्ट करने के लिए ब्रिटिश शासन द्वारा परतंत्र भारत में मैकाले की शिक्षा प्रणाली शुरु की गयी थी, उसके प्रभाव से आज भी शिक्षित समाज में प्रतिष्ठित लोग सनातन धर्म की महिमा से अनभिज्ञ हैं तथा इसका गौरव भूलकर पाश्चात्य काल्पनिक कल्चर से प्रभावित हो रहे हैं। क्योंकि …

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