कृपण नहीं उदार बनें
(पूज्य बापूजी की ज्ञानमयी अमृतवाणी) कृपण कौन है ? जो कर्म करता है और नश्वर चीजें चाहता है, अपनी इच्छाएँ, वासनाएँ, मान्यताएँ नहीं छोड़ता वह कृपण है। जो फल की चाह रखता है या थोड़े-थोड़े काम में फल की इच्छा रखता है, वह कृपण है। बुद्धियोग की शरण जाओ। जो कुछ तुम चाहते हो वह …