ऋषि प्रसाद

सांसारिक, आध्यात्मिक उन्नति, उत्तम स्वास्थ्य, साँस्कृतिक शिक्षा, मोक्ष के सोपान – ऋषि प्रसाद। हरि ओम्।

भगवदीय अपराध की सजा


(पूज्य बापूजी की शिक्षाप्रद अमृतवाणी) जब तक भगवान में प्रीति नहीं होती, तब तक भगवदरस का आस्वादन नहीं होता और व विकार पीछा नहीं छोड़ते। अकबर की बहुत सारी बेगमें थीं। उनमें हिन्दुआनी बेगमें भी थीं। उनमें एक का नाम था जोधाबाई। एक दिन सुबह-सुबह यमुना जी में स्नान करने गयी तो वहाँ देखा कि …

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साधना का अमृतकालः चतुर्मास


30 जून 2012 से 25 नवम्बर 2012 तक केवल पुण्यप्रद ही नहीं, परमावश्यक है चतुर्मास में साधना। आषाढ़ के शुक्ल पक्ष की एकादशी से कार्तिक शुक्ल एकादशी तक भगवान विष्णु योगनिद्रा द्वारा विश्रान्तियोग का आश्रय लेते हुए आत्मा में समाधिस्थ रहते हैं। इस काल को ʹचतुर्मासʹ कहते हैं। संस्कृत में हरि शब्द सूर्य, चन्द्र, वायु, …

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परम उन्नतिकारक श्रीकृष्ण-उद्धव प्रश्नोत्तरी


(पूज्य बापू जी की ज्ञानमयी अमृतवाणी) उद्धवजी ने भगवान श्रीकृष्ण से पूछाः “प्रभु ! दक्षिणा किसको बोलते हैं ?” श्रीकृष्णः “गुरुजनों के उपदेश में जो दक्ष हो जाता है, दृढ़ हो जाता है, अपने मन के नागपाश में जो नहीं आता, गुरु के समक्ष जिसके जाते ही गुरु के मन में हो कि अब इसे …

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