ऋषि प्रसाद

सांसारिक, आध्यात्मिक उन्नति, उत्तम स्वास्थ्य, साँस्कृतिक शिक्षा, मोक्ष के सोपान – ऋषि प्रसाद। हरि ओम्।

स्वतः सिद्ध आत्मा और स्वतः निवृत्त प्रकृति


(पूज्य बापू जी के सत्संग-प्रवचन से) श्रीवसिष्ठजी कहते हैं- “हे रामजी ! यह जगत मिथ्या है। कोई पुरुष इस जगत को सत् जानता है और कहता है कि हम मुक्त होंगे तो ऐसा है जैसे अंधे कूप में जन्म का अंधा गिरे और कहे कि ʹअंधकार में मैं सुखी होऊँगा।ʹ वह मूर्ख है क्योंकि जीव …

Read More ..

श्रेष्ठ गुणों से सम्पन्न – कुष्मांड (कुम्हड़ा या कद्दू)


शीत ऋतु में कुम्हड़े के फल परिपक्व हो जाते हैं। पके फल मधुर, स्निग्ध, शीतल, त्रिदोषहर (विशेषतः पित्तशामक), बुद्धि को मेधावी बनाने वाले, हृदय के लिए हितकर, बलवर्धक, शुक्रवर्धक व विषनाशक हैं। कुम्हड़ा मस्तिष्क को बल व शांति प्रदान करता है। यह निद्राजनक है। अतः अनेक मनोविकार जैसे उन्माद(Schizophrenia), मिर्गी(Epilepsy), स्मृति-ह्रास, अनिद्रा, क्रोध, विभ्रम, उद्वेग, …

Read More ..

सर्वसमर्थ आत्मदेव


पूज्य बापू जी (संत रविदास जयंतीः 7 फरवरी) मंदिरों में, पूजा-पाठ में, इधर-उधर जा-जाकर आखिर उस प्रेमस्वभाव अपने अंतरात्मा में आये, हृदय ही प्रेम से भरपूर मंदिर बन जाय तो समझो हो गयी भक्ति, हो गया ज्ञान, हो गया ध्यान ! ऐसी भक्ति जिनके जीवन में हो, वे चाहे किसी भी उम्र के हों, किसी …

Read More ..