ऋषि प्रसाद

सांसारिक, आध्यात्मिक उन्नति, उत्तम स्वास्थ्य, साँस्कृतिक शिक्षा, मोक्ष के सोपान – ऋषि प्रसाद। हरि ओम्।

आत्मसुख में बाधक व साधक बातें


(पूज्य बापू जी की प्रेरणादायी वाणी) आत्मसुख में पाँच चीजें बाधक और पाँच चीजें साधक हैं। आत्मसुख में बाधक हैः बहुत प्रकार के ग्रंथों को पढ़ना, बहुत दृश्यों को देखना, पिक्चरें देखना। बहिर्मुख लोगों की बातों में आना और उनकी लिखी हुई पुस्तकें पढ़ना, बहुत सारे समाचार सुनना, अखबार-उपन्यास पढ़ना। बुद्धि को बहुत चीजों से …

Read More ..

अनेक रोगों का मूल कारणः विरूद्ध आहार


जो पदार्थ रस-रक्तादि धातुओं के विरूद्ध गुण-धर्म वाले व वात-पित-कफ इन त्रिदोषों को प्रकुपित करने वाले हैं, उनके सेवन से रोगों की उत्पत्ति होती है। इन पदार्थों में कुछ परस्पर गुणविरुद्ध, कुछ संयोगविरूद्ध, कुछ संस्कारविरूद्ध और कुछ देश, काल, मात्रा स्वभाव आदि से विरूद्ध होते हैं। जैसे – दूध के साथ मूँग, उड़द, चना आदि …

Read More ..

ʹयह प्रसादी तेरे चरणों में मेवाड़ का राज्य रख देगीʹ


(श्री गोरखनाथ जयंतीः 5 फरवरी) (पूज्य बापू जी की ज्ञानमयी अमृतवाणी) एक बार गोरखनाथ जी नागदा (राजस्थान में उदयपुर से 27 कि.मी. दूर स्थित एक स्थान) के पास पहाड़ियों में एकांतवास कर रहे थे। वहाँ गोरखनाथ जी ने एक शिवलिंग स्थापित कर रखा था। एक लड़का था, जिसके माँ-बाप चल बसे थे। इस कारण वह …

Read More ..