ऋषि प्रसाद

सांसारिक, आध्यात्मिक उन्नति, उत्तम स्वास्थ्य, साँस्कृतिक शिक्षा, मोक्ष के सोपान – ऋषि प्रसाद। हरि ओम्।

चैतन्य महाप्रभु का भगवत्प्रेम


(पूज्य बापू जी की पावन अमृतवाणी) (श्री चैतन्य महाप्रभु जयन्तीः 8 मार्च) साधुनां दर्शनं पातकनाशनम्। संत के दर्शन से पाप नष्ट होते हैं। भगवान की जब कृपा होती है, अंतरात्मा भगवान जब प्रसन्न होते हैं तब साधु-संगति की रुचि होती है। जब द्रवै दीनदयालु राघव, साधु-संगति पाइये। (विनयपत्रिकाः 136.10) ऐतिहासिक घटित घटना हैः जगन्ननाथ मंदिर …

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भारतीय संस्कृति की महानता


(पूज्य बापू जी के सत्संग से) मैं तो सत्संग करने वाले की अपेक्षा सत्संग सुनने वाले को ज्यादा फायदे में मानता हूँ। यदि सत्संग चार दिन का है तो सत्संग सुनने वाला चाहे दो दिन आये, तीन दिन आये उसकी मौज ! पर सत्संग करने वाले को तो चारों दिन समय से आना है। एक-एक …

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अत्याचार की पराकाष्ठा से उन्नति की पराकाष्ठा तक


(पूज्य बापू जी की पावन अमृतवाणी) विपत्तियों के पहाड़, दुःखों के समुद्र हमें दुःखी बनाने में समर्थ नहीं है, क्योंकि सर्वसमर्थ हमारा आत्मा परम हितैषी है। केवल हम उसे अपना मानें, समर्थ मानें, प्रीतिपूर्वक सुमिरें। सुषुप्ति की जड़ता में भी वह हमारा साथ नहीं छोड़ता, अचेतन अवस्था में भी हमारा साथ नहीं छोड़ता। मृत्यु भी …

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