ऋषि प्रसाद

सांसारिक, आध्यात्मिक उन्नति, उत्तम स्वास्थ्य, साँस्कृतिक शिक्षा, मोक्ष के सोपान – ऋषि प्रसाद। हरि ओम्।

उद्यमः साहसं…..


आदि से पग-पग पर परमात्म-सहायता और आनंद का अनुभव करो धैर्यशील व्यक्ति का मस्तिष्क सदा शांत रहता है। उसकी बुद्धि सदा ठिकाने पर रहती है। उद्यम, साहस, धैर्य, बुद्धि, शक्ति और पराक्रम इन दैवी गुणों से युक्त व्यक्ति आपदाओं और विफलताओं से भय नहीं खाता। अपने को मजबूत बनाने के लिए वह अनेकों उपाय खोज …

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सफल जीवन किसका ?


पूज्य बापू जी के सत्संग-प्रवचन से जीवन सफल उसी का है जो बिना विकारों, बिना बेईमानी, बिना लूट-खसोट के सहज में सुखी रह सकता है, औरों को सुखी कर सकता है। एक बार हरि बाबा बदायूँ जिले (उ.प्र.) के गाँव के पास गंगातट पर पहुँचे। उस समय गंगा जी में बाढ़ आयी हुई थी। गंगा …

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यस्य स्मरणमात्रेण…..


पूज्य बापू जी के सत्संग-प्रवचन से महाभारत में आता है कि यस्य स्मरणमात्रेण जन्मसंसारबन्धनात्। विमुच्यते नमस्तस्मै विष्णवे प्रभविष्णवे।। ‘जिसके स्मरणमात्र से मनुष्य आवागमनरूप बंधन से छूट जाता है, सबको उत्पन्न करने वाले उस परम प्रभु श्रीविष्णु को बार-बार नमस्कार है। जिसकी स्मृतिमात्र से जीव के रोग, शोक, पाप, ताप, दुःख, दरिद्रता, दुर्गुण चले जाते हैं, …

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