ऋषि प्रसाद

सांसारिक, आध्यात्मिक उन्नति, उत्तम स्वास्थ्य, साँस्कृतिक शिक्षा, मोक्ष के सोपान – ऋषि प्रसाद। हरि ओम्।

कैसी सत्ता है !


पूज्य बापू जी की अमृतवाणी शरणानंद जी महाराज हो गये। सूरदास थे लेकिन अँदर की आँखें पूरी खुलीं थीं। दस साल की उम्र में उनकी आँखें चली गयीं, उदास रहे। संतों के सम्पर्क में आये, उदासी और दुःख मिटा लेकिन दुःखहारी की चर्चा सुनते-सुनते इतने उच्च कोटि के महापुरुष बन गये कि आँखें नहीं थीं …

Read More ..

तुम हो अपने चरित्र के विधाता !


(ब्रह्मलीन स्वामी श्री शिवानंदजी सरस्वती) यदि अपने जीवन में सफलता की कामना है, आध्यात्मिक मार्ग पर बढ़ने की अभिलाषा है और आत्मज्ञान प्राप्त करने की लगन है तो निष्कलंक चरित्र का उपार्जन करो। मनुष्य जीवन का सारांश है – चरित्र। मनुष्य का चरित्रमात्र ही सदा जीवित रहता है और मनुष्य को जीवित रखता है। मनुष्य …

Read More ..

अनन्य निष्ठा का संदेश देते हैं हनुमानजी


हनुमान जयंती स्वयं प्रभु श्रीराम जिनके ऋणि बन गये, जिनके प्रेम के वशीभूत हो गये और सीताजी भी जिनसे उऋण न हो सकीं, उन अंजनिपुत्र हनुमानजी की रामभक्ति का वर्णन नहीं किया जा सकता। लंकादाह के बाद वापस आने पर उनके लिए प्रभु श्रीराम को स्वयं कहना पड़ाः “हे हनुमान ! तुमने विदेहराजनंदिनी सीता का …

Read More ..