जीवन का दृष्टिकोण उन्नत बनाती है ‘गीता’
(श्रीमदभगवदगीता जयंतीः 17 दिसम्बर 2010) (पूज्य बापू जी की सारगर्भित अमृतवाणी) ‘यह मेरा हृदय है’ – ऐसा अगर किसी ग्रंथ के लिए भगवान ने कहा तो वह गीता का ग्रंथ है। गीता में हृदयं पार्थ। ‘गीता मेरा हृदय है।’ अन्य किसी ग्रंथ के लिए भगवान ने यह नहीं कहा है कि ‘यह मेरा हृदय है।’ …