सन्देह और स्वीकार
(पूज्य बापू जी के सत्संग-प्रवचन से) एक बात आप समझ लेना कि संसार को जानना हो तो आपको संशय करना पड़ेगा – यह कैसे हुआ, वह कैसे हुआ ? और सत्य को जानना है तो आपको सदगुरुओं के वचन स्वीकार करने पड़ेंगे। संसार को जानना है तो संदेह चाहिए और सत्य को जानना है तो …