ऋषि प्रसाद

सांसारिक, आध्यात्मिक उन्नति, उत्तम स्वास्थ्य, साँस्कृतिक शिक्षा, मोक्ष के सोपान – ऋषि प्रसाद। हरि ओम्।

एक क्षण भी कुसंग न करें – श्री उड़िया बाबा जी महाराज


अच्छे व्यक्तियों का संग करके मानव अनेक सदगुणों से युक्त होता है, जबकि दुर्व्यसनी एवं दुष्टों का संग करके वह कुमार्गी बन जाता है। सत्पुरुषों या संतों अथवा परमात्मा के संग को सत्संग कहते हैं। संत महात्मा तथा विद्वान हमेशा लोक-परलोक का कल्याण करने वाली बातें बताकर लोगों को संस्कारित करते हैं, जबकि व्यसनी अपने …

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भगवन्नाम-माहात्म्य


“राम-नाम के प्रताप से पत्थर तैरने लगे, राम-नाम के बल से वानर-सेना ने रावण के छक्के छुड़ा दिये, राम नाम के सहारे हनुमान ने पर्वत उठा लिया और राक्षसों के घर अनेक वर्ष रहने पर भी सीता जी अपने सतीत्व को बचा सकीं। भरत ने चौदह साल तक प्राण धारण करके रखे क्योंकि उनके कण्ठ …

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आरोपों की वास्तविकता


(जनहित में प्रसारित) पिछले कुछ वर्षों से भारतीय संस्कृति के विरोधियों ने संस्कृति के आधारस्तम्भ सतों सत्पुरुषों को विशेषरूप से निशाना बनाना शुरु किया है। संत श्री आसारामजी बापू एवं उनके आश्रम, जो सत्संग के साथ सेवायोग द्वारा मानवमात्र के उत्थान में लगे हैं, उनके पीछे कुछ विधर्मी तत्त्व काफी लम्बे समय से पड़े हुए …

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