एक क्षण भी कुसंग न करें – श्री उड़िया बाबा जी महाराज
अच्छे व्यक्तियों का संग करके मानव अनेक सदगुणों से युक्त होता है, जबकि दुर्व्यसनी एवं दुष्टों का संग करके वह कुमार्गी बन जाता है। सत्पुरुषों या संतों अथवा परमात्मा के संग को सत्संग कहते हैं। संत महात्मा तथा विद्वान हमेशा लोक-परलोक का कल्याण करने वाली बातें बताकर लोगों को संस्कारित करते हैं, जबकि व्यसनी अपने …