ऋषि प्रसाद

सांसारिक, आध्यात्मिक उन्नति, उत्तम स्वास्थ्य, साँस्कृतिक शिक्षा, मोक्ष के सोपान – ऋषि प्रसाद। हरि ओम्।

माता पिता परम आदरणीय


(पूज्य बापू जी के सत्संग प्रवचन से) एक पिता अपने छोटे से पुत्र को गोद में लिए बैठा था। कहीं से उड़कर एक कौआ उनके सामने छज्जे पर बैठ गया। पुत्र ने पिता से पूछाः “पापा ! यह क्या है ?” पिताः “कौआ है।” पुत्र ने फिर पूछाः “यह क्या है?” पिता ने कहाः “कौआ …

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लगाया झूठा आरोप, हुआ कुदरत का प्रकोप


निर्दोष हृदय की आह ईश्वरीय कोप ले आती है। जुल्मी का जुल्म तेज होता है न, तो तुरंत दंड मिलता है। जुल्मी के पहले के कर्म कुछ पुण्यदायी हैं, तो उसको देर से दंड मिलता है, लेकिन जुल्म करने का फल तो मिलता है, लेकिन जुल्म करने का फल मिलता, मिलता और मिलता ही है …

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कहीं देर न हो जाए…..


मगध नरेश अपनी अश्वशाला और वृषभशाला का बहुत अधिक ध्यान रखता था। वह अपने बलिष्ठ घोड़ों और पुष्ट बैलों को देखने जाता, उनको सहलाता। उसकी वृषभशाला में एक अत्यन्त सुंदर बैल था। उसका सफेद रंग, लम्बे सींग और ऊँचा कंधा किसी का भी ध्यान खींच लेता था। मगध नरेश भी उसे बहुत पसंद करता था। …

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