ऋषि प्रसाद

सांसारिक, आध्यात्मिक उन्नति, उत्तम स्वास्थ्य, साँस्कृतिक शिक्षा, मोक्ष के सोपान – ऋषि प्रसाद। हरि ओम्।

कल्याणकारी छः बातें


पूज्य बापू जी के सत्संग-प्रवचन से परमात्मदेव का ज्ञान, परमात्मदेव की प्रीति, परमात्मदेव में विश्रांति मिले ऐसे कर्म, ऐसा चिंतन, ऐसा संग, ऐसे शास्त्रों का अध्ययन करना, ऐसा भाव बनाना पुरुषार्थ है और इसके विपरीत करना प्रमाद है । प्रमाद मौत की खाई में गिराता है । बार-बार जन्मो, बार-बार मरो, बार-बार माँ की कोख …

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आत्महत्याः कायरता की पराकाष्ठा


पूज्य बापू जी के सत्संग-प्रवचन से मृत्यु एक ईश्वरीय वरदान है, फिर भी यदि कोई आत्महत्या करता है तो वह महापाप है । परमात्मा ने हमें यह अमूल्य मानव चोला दिया है तो हमारा कर्तव्य है कि हम इसे साफ सुथरा रखें, इसे स्वस्थ-तन्दुरुस्त रखें । ऐसा नहीं कि मृत्यु जरूरी है तो अनाप-शनाप खाकर …

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हनुमान जी ने भी उठाया था गोवर्धन


श्री हनुमान जयंतीः लंका पर चढ़ाई करने हेतु समुद्र पर सेतु का निर्माणकार्य पूरे वेग से चल रहा था । असंख्य वानर ‘जय श्री राम !’ की गर्जना के साथ सेवा में जुटे थे । हनुमान जी उड़ान भर-भरके विशाल पर्वतों को श्रीरामसेतु के लिए जुटा रहे थे । दक्षिण के समस्त पर्वत सेतु में …

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