ऋषि प्रसाद

सांसारिक, आध्यात्मिक उन्नति, उत्तम स्वास्थ्य, साँस्कृतिक शिक्षा, मोक्ष के सोपान – ऋषि प्रसाद। हरि ओम्।

दो प्रकार के साधन


संत श्री आसाराम जी बापू के सत्संग-प्रवचन से वेदों में मुख्य रूप से दो प्रकार के साधन बताये गये हैं- विधेयात्मक और निषेधात्मक। यजुर्वेद के बृहदारण्यक उपनिषद् में आता है अहं ब्रह्मास्मि। अर्थात् ‘मैं ब्रह्म हूँ…’ तो जो मैं-मैं बोलता है, वह वास्तव में ब्रह्म है। लेकिन देह को मैं मानकर आप ब्रह्म नहीं होगे। …

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दासबोध


चार प्रकार की मुक्तियाँ होती हैं- सालोक्य, सामीप्य, सारूप्य, सायुज्य। जिस देवता का भजन-पूजन किया, उसी देवता के लोक में निवास, इसे सालोक्य मुक्ति कहा जाता है। देवता के समीप रहना – यह सामीप्य मुक्ति है। प्रिय देवता के समान रूप प्राप्त होना – यह सारूप्य मुक्ति है। स्वर्गलोक में पुण्यों के समाप्त होने पर …

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गुरुमन्त्रपरित्यागी….


संत श्री आसाराम जी बापू के सत्संग-प्रवचन से महाराष्ट्र में समर्थ रामदासजी महाराज प्रसिद्ध संत हो गये। वे छत्रपति शिवाजी के गुरु थे। उनके पास भीतर-बाहर दोनों प्रकार का वैभव था। जबकि तुकाराम जी सीधे-सादे, सरल संत थे। उनका नियम था कि कहीं भी कीर्तन करने जाते तो कीर्तन कराने वालों के घर का भी …

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