दो प्रकार के साधन
संत श्री आसाराम जी बापू के सत्संग-प्रवचन से वेदों में मुख्य रूप से दो प्रकार के साधन बताये गये हैं- विधेयात्मक और निषेधात्मक। यजुर्वेद के बृहदारण्यक उपनिषद् में आता है अहं ब्रह्मास्मि। अर्थात् ‘मैं ब्रह्म हूँ…’ तो जो मैं-मैं बोलता है, वह वास्तव में ब्रह्म है। लेकिन देह को मैं मानकर आप ब्रह्म नहीं होगे। …