ऋषि प्रसाद

सांसारिक, आध्यात्मिक उन्नति, उत्तम स्वास्थ्य, साँस्कृतिक शिक्षा, मोक्ष के सोपान – ऋषि प्रसाद। हरि ओम्।

गीता-ज्ञान से विमुखता


संत श्री आसाराम जी बापू के सत्संग-प्रवचन से किसी का भगवान सातवें अर्श पर रहता है तो किसी का भगवान कहीं और बसता है, लेकिन गीता का भगवान तो जीव को रथ पर बैठाता है और खुद सारथी होकर रथ चलाता है। वह खुद छोटा होकर, सारथी होकर भी जीव को शिव का साक्षात्कार कराने …

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श्रद्धा और अश्रद्धा


संत श्री आसाराम जी बापू के सत्संग-प्रवचन से जैसे लोहे और अग्नि के संयोग से तमाम प्रकार के औजार बन जाते हैं, ऐसे ही श्रद्धा और एकाग्रता से मानसिक योग्यताएँ विकसित होती हैं, आध्यात्मिक अनुभूतियाँ होती हैं तथा सभी प्रकार की सफलताएँ और सिद्धियाँ मिलती हैं। श्रद्धा सही होती है तो सही परिणाम आता है …

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परोपकार की महिमा


संत श्री आसाराम जी बापू के सत्संग-प्रवचन से ‘श्री योग वाशिष्ठ महारामायण’ में आता हैः ‘ज्ञानवान सबसे ऊँचे पद पर विराजता है। वह परम दया की खान होता है। जैसे मेघ समुद्र से जल लेकर वर्षा करते हैं तो उस जल का उत्पत्ति स्थान समुद्र ही होता है, ऐसे ही जितने लोग दयालु दिखते हैं …

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