ऋषि प्रसाद

सांसारिक, आध्यात्मिक उन्नति, उत्तम स्वास्थ्य, साँस्कृतिक शिक्षा, मोक्ष के सोपान – ऋषि प्रसाद। हरि ओम्।

दरिद्र कौन है ?


संत श्री आसाराम जी बापू के सत्संग-प्रवचन से मैंने सुनी है एक कहानीः- एक बाबा जी किसी के यहाँ भोजन करने हेतु गये । भोजन के बाद उसने आग्रह करके दक्षिणा के रूप में बाबा जी को चार पैसे दिये। बाबा जी ने सोचा कि ‘अब इस चार पैसे का क्या करना चाहिए ?’ उन्होंने …

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जैसा खाओ अन्न….


बासमती चावल बेचने वाले एक सेठ की स्टेशन मास्टर से साँठ-गाँठ हो गयी। सेठ को आधी कीमत पर बासमती चावल मिलने लगा। सेठ को हुआ कि इतना पाप हो रहा है तो कुछ धर्म-कर्म भी करना चाहिए। एक दिन उसने बासमती चावल की खीर बनवायी और किसी साधु बाबा को आमंत्रित कर भोजन प्रसाद लेने …

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जल-पान विचार


तृप्ति, संतोष व उत्साह की उत्पत्ति, अन्न के पाचन, रसादि धातुओं के रूपान्तरण और सम्पूर्ण शरीर में रक्त के यथायोग्य परिभ्रमण के लिए जल तथा अन्य पेय पदार्थों की आवश्यकता होती है। सभी पेय पदार्थों में पानी सर्वश्रेष्ठ है। इसे जीवन कहा गया है। शारीरिक बल, आरोग्य और पुष्टि की वृद्धि में जल सहायक होता …

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