ऋषि प्रसाद

सांसारिक, आध्यात्मिक उन्नति, उत्तम स्वास्थ्य, साँस्कृतिक शिक्षा, मोक्ष के सोपान – ऋषि प्रसाद। हरि ओम्।

श्रद्धायुक्त दान का फल


एक सेठ था। वह खूब दान-पुण्य इत्यादि करता था। प्रतिदिन जब तक सवा मन अन्नदान न कर लेता तब तक वह अन्न जल ग्रहण नहीं करता था। उसका यह  नियम काफी समय से चला आ रहा था। उस सेठ के लड़के का विवाह हुआ। जो लड़की उसकी बहू बनकर आई, वह सत्संगी थी। वह अपने …

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त्याग और पवित्रता


संत श्री आसाराम जी बापू के सत्संग-प्रवचन से त्याग और पवित्रता – ये भारतीय संस्कृति के आध्यात्मिक खजाने की दो अनुपम कुंजियाँ हैं। जीवन में त्याग होना चाहिए। आप कोई काम करते हैं और उसमें आपकी स्वार्थ बुद्धि होती है तो बुद्धि कुंठित हो जाती है और आपकी योग्यता कम हो जाती है। अगर स्वार्थरहित …

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तीन तनावों में पिसा जा रहा है संसार…


संत श्री आसाराम जी बापू के सत्संग-प्रवचन से सारा संसार तीन तनावों में तना जा रहा हैः शारीरिक तनाव, मानसिक तनाव और भावनात्मक तनाव। इन तीनों तनावों की भीषण चक्की में देश विदेश के सभी मनुष्य पिसे जा रहे हैं। आत्महत्या के कारणों की जाँच करने वाले एक अध्ययन के अनुसार 98 प्रतिशत आत्महत्याएँ मानसिक …

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