अध्यात्मज्ञान का नित्य अभ्यास करें….
संत श्री आसाराम जी बापू के सत्संग-प्रवचन से अध्यात्मज्ञाननित्यत्वं तत्त्वज्ञानार्थदर्शनम्। एतज्ज्ञानमिति प्रोक्तमज्ञानं यदतोऽन्यथा।। ‘अध्यात्मज्ञान में नित्य स्थिति और तत्त्वज्ञान के अर्थरूप परमात्मा को ही देखना-यह सब ज्ञान है और जो इससे विपरीत है, वह अज्ञान है- ऐसा कहा है।’ भगवद्गीताः 13.11 संसार में जितने भी दुःख हैं, सब आत्मा के अज्ञान के कारण हैं, अध्यात्मज्ञान …