भक्त तुलाधार
संत श्री आसाराम जी बापू के सत्संग-प्रवचन से श्री रामचरितमानस में आया हैः गौधन गजधन बाजिधन, और रतन धन खान। जब आवे संतोष धन, सब धन धूरि समान।। भक्त तुलाधार इसी संतोषरूपी धन के धनी थे। उन्होंने अयाचक व्रत ( न माँगने का व्रत) धारण किया था। वे खेत में फसल कटने पर अन्न के …