ऋषि प्रसाद

सांसारिक, आध्यात्मिक उन्नति, उत्तम स्वास्थ्य, साँस्कृतिक शिक्षा, मोक्ष के सोपान – ऋषि प्रसाद। हरि ओम्।

भक्त तुलाधार


संत श्री आसाराम जी बापू के सत्संग-प्रवचन से श्री रामचरितमानस में आया हैः गौधन गजधन बाजिधन, और रतन धन खान। जब आवे संतोष धन, सब धन धूरि समान।। भक्त तुलाधार इसी संतोषरूपी धन के धनी थे। उन्होंने अयाचक व्रत ( न माँगने का  व्रत) धारण किया था। वे खेत में फसल कटने पर अन्न के …

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चरित्र की पवित्रता


चरित्र की पवित्रता हर कार्य में सफल बनाती है। जिसका जीवन संयमी है, सच्चचरित्रता से परिपूर्ण है उसकी गाथा इतिहास के पन्नों पर गायी जाती है। हरि सिंह नलवा का व्यक्तित्व ऐसा ही था। पंजाब के पड़ोसी काबुल द्वारा बार-बार पंजाब के सीमावर्ती इलाकों पर आक्रमण हो रहा था। उसका सामना करने के लिए प्रधान …

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कर्म के प्रकार


(पुण्यतोया साबरमती के तट पर स्थित आश्रम में अपने एकांत निवास के दौरान कर्म के प्रकार का वर्णन करते हुए पूज्य श्री ने बतायाः) कर्म तीन प्रकार के होते हैं- प्रारब्ध कर्म, संचित कर्म और क्रियमाण कर्म। मान लो हजारों मन अनाज का ढेर पड़ा है, उसमें से आपने दस किलो अनाज पीसकर आटा बना …

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