ऋषि प्रसाद

सांसारिक, आध्यात्मिक उन्नति, उत्तम स्वास्थ्य, साँस्कृतिक शिक्षा, मोक्ष के सोपान – ऋषि प्रसाद। हरि ओम्।

वास्तविक अमृत कहाँ ?


राजा भोज के दरबार में चर्चा हो रही थी किः “अमृत कहाँ होगा ?” एक विद्वान ने कहाः “अमृत कहाँ होगा पूछने की क्या जरूरत है ? स्वर्ग में अमृत है।” दूसरे विद्वान ने कहाः “ठहरो। स्वर्ग में अगर अमृत होता तो फिर स्वर्ग से पतन नहीं होना चाहिए। पुण्यों का नाश नहीं होना चाहिए …

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सात्त्विक ऊर्जा द्वारा दैवी गुणों का विकास करता है पिरामिड


सनातन धर्म के मंदिरों की छत पर एक त्रिकोणीय आकृति बनी होती है। जिसे वास्तुशास्त्र एवं वैज्ञानिक भाषा में पिरामिड कहते हैं। यह आकृति अपने आप में अदभुत है। हमारे ऋषियों ने ब्रह्माण्ड के तत्त्वों का सूक्ष्म अध्ययन करके उनसे लाभ लेने के लिए अनेक प्रयोग किये। मंदिर के शिखर की पिरामिडीय आकृति उन्हीं प्रयोगों …

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निरन्तर यत्न करें…..


संत श्री आशाराम जी के सत्संग प्रवचन से योगी युञ्जीत सततमात्मानं रहसि स्थितः। एकाकी यतचित्तात्मा निराशीरपरिग्रहः।। ‘मन और इन्द्रियों सहित शरीर को वश में रखने वाला, आशारहित और संग्रहरहित योगी अकेला ही एकांत स्थान में स्थित होकर आत्मा को निरन्तर परमात्मा में लगावे।’ (गीताः 6.10) जिसको परमसत्य का अनुभव करना हो, वह भोगबुद्धि से संग्रह …

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