ऋषि प्रसाद

सांसारिक, आध्यात्मिक उन्नति, उत्तम स्वास्थ्य, साँस्कृतिक शिक्षा, मोक्ष के सोपान – ऋषि प्रसाद। हरि ओम्।

शरीर की अपवित्रता और भावों की पवित्रता


सभी शास्त्रों ने, आत्मानुभवी महापुरुषों ने इस नश्वर शरीर को अपवित्र बताया है और यह भी कहा है कि इस अपवित्र शरीर में यदि भाव शुद्ध हों तो इसी शरीर से परम पवित्र, शाश्वत आत्मा-परमात्मा का अनुभव भी हो सकता है । इस संदर्भ  शिव पुराण में सनत्कुमारजी भगवान वेदव्यास जी से कहते हैं- “हे …

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महान से महान बना देता है सत्संग – पूज्य बापू जी देवर्षि नारदजी जयंती 27 मई 2021 5 साल का दासीपुत्र था । उसके पिता मर गये थे और विधवा माँ ऐसी थी कि जहाँ कहीं भी काम मिले-बर्तन धोने, झाडू लगाने आदि का, कर लेती थी, पक्की नौकरी नहीं थी । गाँव में संत …

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…उसी समय हृदय भगवान की कृपा से भर जाता है


प्राणी के अंतःकरण में जिन दोषों के कारण अशुद्धि या मलिनता है वे दोष कहीं बाहर से आये हुए नहीं हैं, स्वयं उसी के द्वारा बनाये हुए हैं । अतः उनको निकालकर अंतःकरण को शुद्ध बनाने में यह सर्वथा स्वतंत्र है । मनुष्य सोचता है और कहता है कि ‘मेरे प्रारब्ध ही कुछ ऐसे हैं …

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