शरीर की अपवित्रता और भावों की पवित्रता
सभी शास्त्रों ने, आत्मानुभवी महापुरुषों ने इस नश्वर शरीर को अपवित्र बताया है और यह भी कहा है कि इस अपवित्र शरीर में यदि भाव शुद्ध हों तो इसी शरीर से परम पवित्र, शाश्वत आत्मा-परमात्मा का अनुभव भी हो सकता है । इस संदर्भ शिव पुराण में सनत्कुमारजी भगवान वेदव्यास जी से कहते हैं- “हे …