निःस्पृहता का प्रभाव
संत श्री आशाराम जी बापू के सत्संग-प्रवचन से यदा विनियतं चित्तमात्मन्येवावतिष्ठते। निःस्पृह सर्वकामेभ्यो युक्त इत्युच्यते तदा।। ‘अत्यंत वश में किया हुआ चित्त जिस काल में परमात्मा में ही भलीभाँति स्थित हो जाता है, उस काल में संपूर्ण भोगों से स्पृहारहित पुरुष योगयुक्त है, ऐसा कहा जाता है।’ (गीताः 6.18) जिस काल में तुम्हारे चित्त में …