ऋषि प्रसाद

सांसारिक, आध्यात्मिक उन्नति, उत्तम स्वास्थ्य, साँस्कृतिक शिक्षा, मोक्ष के सोपान – ऋषि प्रसाद। हरि ओम्।

निर्वासनिक बनें….


संत श्री आसारामजी बापू के सत्संग-प्रवचन से ʹश्रीयोगवाशिष्ठ महारामायणʹ में आता हैः ʹहे राम जी ! बहुत शास्त्र और वेद मैं तुम्हें किसलिये सुनाऊँ और कहूँ ? वेदान्तशास्त्र का सिद्धान्त यही है कि किसी भी प्रकार से वासना से रहित हो, इसी का नाम मोक्ष है। वासनासहित का नाम बंधन है। हे राम जी जो …

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ʹगहना कर्मणो गतिःʹ


संत श्री आसारामजी बापू के सत्संग-प्रवचन से कर्म की गति बड़ी गहन है। गहना कर्मणो गतिः। कर्म का तत्त्व भी जानना चाहिए, अकर्म का तत्त्व भी जानना चाहिए। कर्म ऐसे करें कि कर्म दुष्कर्म न बनें, बंधनकारक न बनें, वरन् ऐसे कर्म करें कि कर्म विकर्म में बदल जायें, कर्त्ता अकर्त्ता हो जाये और वह …

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वाममार्ग और भ्रष्टाचार


हमारे देश के युवावर्ग को एक ओर तो तथाकथित मनोचिकित्सक गुमराह कर उसे संयम-सदाचार और ब्रह्मचर्य से भ्रष्ट करके अनिंयत्रित विकारों के शिकार बना रहे हैं तो दूसरी ओर कुछ तथाकथित विद्वान वाममार्ग का सही अर्थ न समझ सकने के कारण स्वयं तो दिग्भ्रमित हैं ही, साथ ही उसके आधार पर ʹसंभोग से समाधिʹ की …

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