महासंकल्प और वर्तमान संकल्प
संत श्री आसारामजी बापू के सत्संग-प्रवचन से यदा हि नेन्द्रियार्थेषु न कर्मस्वनषज्जते। सर्वसंकल्पसंन्यासी योगारूढस्तदोच्यते।। ʹजिस काल में न तो इन्द्रियों के भोगों में और न कर्मों में ही आसक्त होता है उस काल में सर्व संकल्पों का त्यागी पुरुष योगारूढ़ कहा जाता है।ʹ (श्रीमद् भगवद् गीताः 6-4) इस श्लोक के द्वारा भगवान स्वयं आपने भगवद-अनुभव …