ऋषि प्रसाद

सांसारिक, आध्यात्मिक उन्नति, उत्तम स्वास्थ्य, साँस्कृतिक शिक्षा, मोक्ष के सोपान – ऋषि प्रसाद। हरि ओम्।

महासंकल्प और वर्तमान संकल्प


संत श्री आसारामजी बापू के सत्संग-प्रवचन से यदा हि नेन्द्रियार्थेषु न कर्मस्वनषज्जते। सर्वसंकल्पसंन्यासी योगारूढस्तदोच्यते।। ʹजिस काल में न तो इन्द्रियों के भोगों में और न कर्मों में ही आसक्त होता है उस काल में सर्व संकल्पों का त्यागी पुरुष योगारूढ़ कहा जाता है।ʹ (श्रीमद् भगवद् गीताः 6-4) इस श्लोक के द्वारा भगवान स्वयं आपने भगवद-अनुभव …

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शीत ऋतु का सूखा मेवाः अंजीर


अञ्जीर की लाल, काली, सफेद और पीली ये चार प्रकार की जातियाँ पायी जाती हैं। इसके कच्चे फलों की सब्जी बनती है। पके अंजीर का मुरब्बा बनता है। अधिक मात्रा में अंजीर खाने से यकृत(Liver) एवं जठर को नुकसान होता है। बादाम खाने से अञ्जीर के दोषों का शमन होता है। गुण-धर्मः पके, ताजे अञ्जीर …

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भक्ति की महिमा


संत श्री आसाराम जी बापू के सत्संग-प्रवचन से श्रीकृष्ण कहते हैं- न साधयति मां योगो न सांख्यं धर्म उद्धव। न स्वाध्यायस्तपस्तयागो यथा भक्तिर्ममोर्जिता।। ʹउद्धव ! योग-साधन, ज्ञान-विज्ञान, धर्मानुष्ठान, जप-पाठ और तप-त्याग मुझे प्राप्त कराने में उतने समर्थ नहीं हैं जितनी दिनों-दिन बढ़ने  वाली अनन्य प्रेममयी मेरी भक्ति।ʹ (श्रीमद् भागवतः 11.14.20( भले ही कोई धन-दौलत के …

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