ऋषि प्रसाद

सांसारिक, आध्यात्मिक उन्नति, उत्तम स्वास्थ्य, साँस्कृतिक शिक्षा, मोक्ष के सोपान – ऋषि प्रसाद। हरि ओम्।

स्वप्न को स्वप्न जान लो


संत श्री आसाराम बापू जी के सत्संग-प्रवचन से मानव का यह सहज स्वभाव है कि वह सदैव जाग्रत अवस्था का ही ख्याल करता है, जाग्रत को ही सुधारना चाहता है, जाग्रत में ही सुखी होना चाहता है। स्वप्न एवं सुषुप्ति का वह जरा भी ख्याल नहीं करता जबकि केवल जाग्रत अवस्था ही उसकी नहीं है, …

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सेहत और सावधानियाँ


आयुर्वेद के तीन उपस्तम्भ हैं- आहार निद्रा और ब्रह्मचर्य। जीवन में सुख-शांति व समृद्धि प्राप्त करने के लिए स्वस्थ शरीर की नितान्त आवश्यकता है क्योंकि स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मन और विवेकवती कुशाग्र बुद्धि प्राप्त हो सकती है। मनुष्य को स्वस्थ रहने के लिए उचित निद्रा, श्रम, व्यायाम और संतुलित आहार अति आवश्यक है। …

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साधना में सत्संग की आवश्यकता


संत श्री आसारामजी बापू के सत्संग-प्रवचन से जप, तप, व्रत, उपवास, ध्यान, भजन, योग आदि साधन अगर सत्संग के बिना किये जायें तो उनमें रस नहीं आता। वे तो साधनमात्र हैं। सत्संग के बिना वे व्यक्तित्व के सिंगार बन जाते हैं। जब तक ब्रह्मवेत्ता महापुरुष का जीवंत सान्निध्य इन साधनों को सुहावना नहीं बनाता, तब …

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