ऋषि प्रसाद

सांसारिक, आध्यात्मिक उन्नति, उत्तम स्वास्थ्य, साँस्कृतिक शिक्षा, मोक्ष के सोपान – ऋषि प्रसाद। हरि ओम्।

अपनी योग्यता बढ़ाओ


संत श्री आसाराम जी बापू के सत्संग-प्रवचन से जीवन जीने के दो मार्ग हैं। श्रेय मार्ग और प्रेय मार्ग। श्रेयस बोलता हैः ʹदे दो…. दे दो…. अपने पास जो कुछ भी उसे दूसरों की सेवा में लगा दो, दूसरों की आवश्यकतापूर्ति में लगा दो।ʹ प्रेयस बोलता हैः ʹले लो… ले लो…. अपने पास बहुत कम …

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अगर है शौक मिलने का तो कर खिदमत फकीरों की


संत श्री रैदास जी महाराज जयंतीः 8 फरवरी 2001 काशीनरेश अपने मंत्री से कहते हैं- “बाहर से तो मैं बड़ा सुखी हूँ क्योंकि मेरे पास यौवन, आरोग्यता और संपत्ति है, लेकिन भीतर से दुःखी भी बहुत हूँ क्योंकि हृदय में शांति नहीं है। अभी मैंने परम शांति नहीं पाई है, अपनी अंतरात्मा के सुख का …

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तीन तत्त्वों का मिश्रणः मनुष्य


संत श्री आसारामजी बापू के सत्संग-प्रवचन से मनुष्य का शरीर इन तीन तत्त्वों का मिश्रण हैः पाशवीय तत्त्व, मानवीय तत्त्व और ईश्वरीय तत्त्व। पाशवीय तत्त्व अर्थात् पशु जैसा आचरण। चाहे जैसा खाना-पीना, माता-पिता की बात को ठुकरा देना, समाज को ठुकरा देना। जैसे, ढोर चलता है ऐसे ही मन के अनुसार चलना। ये पाशवीय तत्त्व …

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